अक्टूबर माह के त्योहार

त्योहारों की भूमि भारत में आपका स्वागत है - भारत को विशेष रुप से त्योहारों की भूमि के रूप में जाना जाता है। यह एक ऐसा देश है जहां आप पूरे साल विभिन्न धर्मों, विभिन्न समुदायों के विभिन्न त्यौहारों का जश्न एक साथ मिलकर मना सकते हैं। यहां साल के प्रत्येक दिन कोई ना कोई त्यौहार किसी ना किसी राज्य में मनाया जा रहा होता है। भारत में साल के 365 दिन 12 महीनें त्यौहार मनाए जाते हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, सिंधी, बौद्ध एवं जैन धर्म जैसे अनेकों धर्मों के त्यौहार यहां मनाए जाते हैं। यही कारण है कि भारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश के रुप में पहचाना जाता है। भारत में कई धार्मिक, पारंपरिक, समाजिक एवं राष्ट्रीय त्यौहार मनाए जाते हैं जिनका अपना-अपना महत्व है। यहां के प्रत्येक त्यौहार के पीछे एक विशेष कथा एवं एक कारण छिपा होता जो उसकी महत्वता को प्रदर्शित करता है।

भारत के हिन्दू धर्म के अनुसार महीनों के विभिन्न नाम एवं उनका अपना-अपना महत्व है। भारत के प्रत्येक माह की तरह की तरह अक्टूबर जिसे हिंदी पंचांग अनुसार आश्विन और कार्तिक माह माना जाता है। इसका भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। अक्टूबर का महीना त्यौहारों से भरी टोकरी के समान होता है। आश्विन और कार्तिक के मास 'शरद ऋतु' के मास होते हैं। इस समय अधिक गर्मी होती है ना बारिश और ठंड यह महीना मौसम के लिहाज़ से ही सबसे उत्तम माना जाता है। आश्विन कार्तिक महीने में कई धार्मिक त्यौहार, व्रत एवं उपासना की जाती है। आश्विन माह की शुरुआत देवी दुर्गा के नौ रुपों की पूजा शारदीय नवरात्रि जिसे महानवरात्रि भी कहा जाता है होती है। नवरात्री के इस मेले को हिन्दू धर्म में लगभग सभी राज्यों में मनाया जाता है। दांडिया, गरबा खेल कर मां को समर्पण किया जाता है। वहीं इन दिनों रामलीला का जगह-जगह दस दिनों तक भव्य आयोजन किया जाता है जहां भगवान राम के जन्म से लेकर रावण पर विजय प्राप्ति तक की घटनाओं को वर्णित किया जाता है। यही नहीं नवरात्रि के अगले दिन यानि दसमी को विजयदशमी अर्थात दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है। इस माह में दिवाली का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार भी मनाया जाएगा। इसके साथ ही करवा चौथ, अहोई अष्टमी जैसे त्यौहार भी इस माह मनाए जाएगें

अक्टूबर का महीना केवल धार्मिक दृष्टि से ही संपन्न नहीं होता बल्कि इसमे कई देशभक्ति और सार्वजनिक रुप से मनाए जाने वाले त्यौहार और उत्सव भी मनाए जाते है। अक्टूबर माह की शुरुआत में 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्र पिता महात्मा गांधी साथ ही लाल बहादूर शास्त्री जी की जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है। अक्टूबर माह में 31 अक्टूबर को देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी मनाई जाती है और इनके साथ ही लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्मोत्सव राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में मनाया जाता है। अक्टूबर माह के अन्य त्योहारों की सूची नीचे दी गई है।
 

गांधी जयंती और लाल बहादूर शास्त्री जयंती - 2 अक्टूबर

गांधी जयंती और लाल बहादूर शास्त्री

अक्टूबर का महीना त्यौहारों का महीना होता है। इस महीने में देशभक्ति, धार्मिक, समाजिक कई त्यौहार एवं उत्सव मनाए जाते हैं। अक्टूबर माह की शुरुआत में 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे, उन्होंने उम्र भर हिंसा से भरा कोई काम ना किया और ना ही करने दिया। उनके हथियार सत्य और अहिंसा थे। इसलिए इस दिन को अहिंसा दिवस के रुप में भी जाना जाता है। वहीं इसी दिन देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री जी की भी जयंती मनाई जाती है। शास्त्री जी ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। वो सच्चे गांधीवादी थे। उन्होंने अपना सारा जीवन सादगी से बिताया और उसे गरीबों की सेवा में लगाया। असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आन्दोलन में उनका बहुत सहयोग रहा।


नवरात्रि, दुर्गा पूजा- 4 से 7 अक्टूबर


दुर्गा पूजा

अक्टूबर माह की महीना देवी पूजा का महीना भी कहा जाता है। चूंकि यह महीना अश्विन और कार्तिक के हिंदू महीनों के अनुरूप है, अक्टूबर में नवरात्रि,और दुर्गा पूजा जैसे अधिक प्रतीक्षित उत्सव आयोजित किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल और असम में दुर्गा पूजा के वक्त सार्वजनिक अवकाश की घोषणा हो जाती है। दुर्गा मां, जिन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके 9 रूप हैं। इस बार दुर्गा पूजा 4 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। इसके साथ ही 4 अक्टूबर को नवरात्रि में सरस्वती आह्वान मनाया जाएगा। 6 अक्टूबर को महानवमी एवं 7 अक्टूबर को आयुध पूजा की जाएगी।


दशहरा- 8 अक्टूबर

दशहरा

अक्टूबर माह में 8 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के साथ ही दशहरे का उत्सव मनाया जाएगा। दशहरे से 14 दिन पहले तक रामलीला दिखाई जाती है, जिसमें भगवान राम की जीवन लीला स्टेज पर दर्शाई जाती है। आखिरी दिन रावण का वध होता है और इसी के साथ रामलीला भी खत्म हो जाती है। दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।


राष्ट्रीय वायु सेना दिवस- 8 अक्टूबर

राष्ट्रीय वायु सेना दिवस

अक्टूबर माह में 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय वायु सेना दिवस भी मनाया जाता है। भारतीय वायु सेना की नींव 8 अक्टूबर 1932 को रखी गई थी। आजादी से पहले इसे रॉयल इंडियन एयर फोर्स कहते थे। अब हर साल 8 अक्टूबर को “वायु सेना दिवस” मनाया जाता है। वहीं 24 अक्टूबर को यूएनओ दिवस मनाया जाता है। विश्व में शांति रहे, व्यापार बढ़े, अर्थव्यवस्था सुधरे, सामाजिक विकास हो इन्ही सब को ध्यान में रख कर 24 अक्टूबर 1945 को आधिकारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र संगठन यानि यूएनओ की स्थापना हुई।


मुंशी प्रेमचंद्र और जय प्रकाश नारायण की पुण्यतिथि- 8 अक्टूबर

मुंशी प्रेमचंद्र और जय प्रकाश नरायण की पुण्यतिथि

अक्टूबर का माह कई महानुभवों की पुण्यतिथि से भी जुड़ा है। 8 अक्टूबर को मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। हिंदी लेखन में इनका सबसे बड़ा योगदान रहा है। मुंशी प्रेमचंद जी ने कई उपन्यास और साहित्य लिखे जो आज भी स्कूलों में पढा़ए जाते हैं। इनके उपन्यासों पर कई कार्यक्रम और नाटक भी बने हैं। मुंशी जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ था और अक्टूबर 8, 1936 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। वहीं 8 अक्टूबर को ही जय प्रकाश नारायण जिनको जेपी के नाम से भी जाना जाता है वो भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और जनता के नेता थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था उनकी पुण्यतिथी भी मनाई जाती है।


गुरु राम दास जयंती- 9 अक्टूबर

गुरु राम दास जयंती

इसी माह में दुनिया भर में सिख 9 अक्टूबर को गुरु राम दास जयंती मनाएंगे। श्री गुरु राम दास जी सिखों के चौथे गुरु हैं। आज के दौर में जो अमृतसर शहर है वो गुरु राम दास जी ने ही बसाया था। गुरु राम दास जी  ने ही शादी के लिये चार फेरे (लावां) तय किये थे। गुरु रामदास जी का जन्म लाहौर के चूना मंडी में 24 सितम्बर 1534 को हुआ था।


पापांकुशा एकादशी- 9 अक्टूबर

पापांकुशा एकादशी

अक्टूबर माह में कई व्रत किए जाते हैं। आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे अहम होती है। इस एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा गया है, जिसका मतलब है पाप पर अंकुश लगाने वाली एकादशी। यह एकादशी 9 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसके साथ ही 13 अक्टूबर को कोजागारी पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन काफी अहम पूजा होती है, जिसका नाम है कोजागरी लक्ष्मी पूजा है। ये पूजा बंगाल, असम और ओडिशा में मुख्यत: की जाती है। यहीं नहीं 13 अक्टूबर को ही रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती भारत में बहुत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। वाल्मीकि जंयती प्रसिद्ध कवि वाल्मीकि के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। 14 अक्टूबर को कोरट्टी मुठी उत्सव मनाया जाएगा। कोरट्टी मुठी उत्सव केरल का एक प्रसिद्ध उत्सव है जो ईसाई धर्म को इंगित करता है। कोरट्टी मुठी उत्सव केरल के प्रमुख चर्च कोरट्टी मुठी एस (सेंट मैरी एस) का प्रतिक है वेलाकन्नी चर्च के यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण चर्च एवं तीर्थ स्थल है।


करवा चौथ- 17 अक्टूबर

करवा चौथ

17 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा जो हिन्दू मान्यता में सुहागिन स्त्रियों के लिए सबसे बड़ा व्रत होता है इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है शाम को चांद देखकर व्रत खोलती हैं। इसके बाद 21 अक्टूबर को अहोई अष्टमी का उपवास भी रखा जाएगा। जो बच्चों की लबीं उम्र के लिए होता है।


काटी बिहू- 19 अक्टूबर


काटी बिहू

अक्टूबर माह में कई उत्सव और व्रत इत्यादि भी किए जाते हैं। इस महीने में असम में काटी बिहू का उत्सव जोर-शोर से मनाया जाएगा। इस महीने में घरों में रखा अनाज लगभग खत्म हो जाता है, इसलिये असमी लोग अनाज भंडार, तुलसी, और धान के खेत के पास मिट्टी का दीया जलाते हैं। 


तुला संक्रांति- 18 अक्टूबर

तुला संक्रांति

तुला संक्रांति के वक्त सूर्य तुला राशि में प्रवेश कर जाते हैं। तुला संक्रांति पूरे साल में होने वाली 12 संक्रांतियों में से एक है। इस साल तुला संक्रांति 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसके साथ ही 24 अक्टूबर को कार्तिक मास में रमा एकादशी मनाई जाएगी। रमा एकादशी के दिन भगवत गीता को पढ़ना भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धालु पूरा दिन व्रत रखते हैं और भगवान का स्मरण करते हैं। कहा गया है कि रमा एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप धुल जाते हैं।


दीपावली - 27 अक्टूबर

दीपावली

अक्टूबर यानि कार्तिक माह का बहुप्रतिक्षित त्योहार दिवाली यूं को 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी। लेकिन इसकी शुरुआत 25 अक्टूबर धनतेरस के दिन ही हो जाएगी। हिन्दू मान्यताओं में इस दिन विशेष रुप से धन की देवी और देवता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। पांच दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार का पहला दिन धनतेरस के रुप में मनाया जाता है। दिवाली का दूसरा दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। यह 26 अक्टूबर क मनाई जाएगी। तीसरे दिन यानि 27 अक्टूबर को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान राम के घर वापसी के रुप में मनाया जाता है। दिवाली के दिन ही यानि 27 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम में इसे काली पूजा के रुप में मनाया जाता है। इस दिन मां काली की पूजा की जाती है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है यह 28 अक्टूबर को हागी। और अंतिम दिन यानि 29 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा। जिसमें बहने भाई की सलामती का दुआ मांगती है।


निंगोल चाकोबा- 30 अक्टूबर

निंगोल चाकोबा

अक्टूबर माह में कई राज्यों के त्योहार भी मनाए जाते हैं उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर के लोगों के लिए निंगोल चाकोबा का त्योहार प्रमुख होता है। यह मजाक का दिन भी होता है मणिपुर में इस दिन कुकी चिन मिजो कुट उत्सव को मनाया जाता है। जिसमें भगवान की उदारता और उनकी विरासत के रुप में इस दिन को मनाया जाता है। यही नहीं मणिपुर में नवंबर की पांच तारीख को निंगोल चाकोबा का त्यौहार मनाया जाता है। मणिपुर में निंगोल लड़कियों को कहते हैं लड़कियों की महत्वता को प्रदर्शित करने के लिए इस उत्सव को मनाया जाता है।


इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती- 31 अक्टूबर


इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती

अक्टूबर का महीना धार्मिक रुप से संपन्न होने के साथ-साथ कई महानपुरुषों एवं प्रभावशाली व्यक्तित्वों की जन्मतिथि एवं पुण्यतिथि का भी साक्षी है। अक्टूबर माह के अंत में 31 अक्टूबर को देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है। 31 अक्टूबर 1984 को उनकी हत्या कर दी गई थी जिसके श्रद्धांजलि स्वरुप उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया जाता है। यहीं नहीं इसी दिन देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में मनाई जाती है।


अक्टूबर माह के अन्य मेले और उत्सव

बटेश्वर मेला

अक्टूबर माह में कई मेलों का आयोजन किया जाता है जिसमें उत्तर प्रदेश के बाराबंकी मेला बहुत प्रसिद्ध है। देव शरीफ बाराबंकी जिले के देवा नामक कस्बे में स्थित एक प्रसिद्ध एतिहासिक हिन्दू / मुस्लिम धार्मिक स्थल है। यहाँ पर कौमी एकता के प्रतीक हाजी वारिस अली शाह की दरगाह है। प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन यहां होता है। वहीं बाटेश्वर मेला 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक गठजोड़ का जीता जागता उदाहरण है। आगरा से महज 70 किलोमीटर की दूर पर यमुना नदी के किनार है बटेश्वर। बटेश्वर महादेव और 108 मंदिर होने के कारण इसका नाम बटेश्वर गांव पड़ा। इस गांव में आकर यमुना नदी उल्टी बहना शुरू हो जाती है। हर साल यहां पर पशु मेला लगता है। ये कहने को पशु मेला होता है, लेकिन यहां के मेले की रौनक के आगे बड़े बड़े मेले फीके नज़र आते हैं।

इसके साथ ही अक्टूबर माह में, कवी सम्मेलन, पतंग उड़ाना, राइफल शूटिंग इत्यादि सहित समारोह आपको पूरे माह व्यस्त रहेंगे। यह अक्टूबर के महीने का सबसे अविश्वसनीय पहलू है कि त्यौहार, मेले जैसे नागालैंड का, त्सोकुम उत्सव, जम्मू और कश्मीर का झिड़ी मेला रायलसेम्मा फूड एंड डांस फेस्टिवल, आदि का आयोजन किया जाता है जो भारत के राज्यों और समुदायों की संस्कृति और विशेषता को प्रदर्शित कर एकजुटता की भावना का विकास करती है।

कुल मिलाकर अक्टूबर का महीना आपको धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ देश की पंरपरा एवं महानुभवों से परिचित कराने वाला माह होता है।

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