आंवला एक ऐसा पेड़ है जिसका फल कई बीमारियों को जड़ से खत्म करके बुरी शक्तियों को दूर भगाता है। वहीं आंवले पेड़ पर कई देवी देवताओं का भी निवास होता है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष को आंवला नवमी के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं आंवले के वृक्ष की पूजा करती हैं। माना जाता है कि इस दिन की पूजा का फल कई जन्मों तक मिलता है और जो भी बुरी शक्तियां आपके पीछे पड़ी हुई होती हैं वो भाग जाती हैं।

पूजा सामग्री

-आंवले का वृक्ष या टहनियां
-कलश में पानी
-दूध
-मौली, टीका, चावल, गुड़, बताशे
-कच्चा सफेद धागा
-धूप, दीपक

पूजा विधि


-सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें
-आंवले के वृक्ष के नीचे बैठें
-आंवले की जड़ों पर दूध चढ़ाएं
-वृक्ष के तने पर कच्चा सफेद धागा लपेटें
-धूप, दीप और तिलक लगाएं
-आंंवले के वृक्ष के सात फेरे लें
-आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करें

मान्यता

माना जाता है कि आंवला नवमी के दिन आंवला वृक्ष पर खुद भगवान विष्णु और भगवान शिव मौजूद होते हैं। यही नहीं आचार्य चरक ने अपने लेखों में लिखा है कि इस दिन महर्षि च्यवन ने आंवला खाया था और उनका शरीर फिर से जवान हो गया था। अगर इस दिन कोई ये उपाय करे तो फिर से तंदरुस्ती मिल सकती है। हालांकि ये मेडिकल साइंस ने भी माना हुआ है कि आंवले में रोग खत्म करने वाले कई गुण होते हैं।
 
To read this article in English click here
April (Chaitra/Baisakh)