भारत ऐसा देश है जहां लोगों के लिये खुद से पहले अपना परिवार आता है। अपने परिवार को कोई आंच नहीं आने देना चाहता। अहोई व्रत भी अपने बच्चों और परिवार के लिये रखा जाता है। अहोई व्रत कार्तिक मास में रखा जाता है जिसे सिर्फ पुत्रवती महिलाएं यानि जिनके बच्चे हों वही रख सकती हैं। इस दिन महिलाएं पूरा दिन व्रत रखती हैं और शाम को होई (दिवार पर हाथ से प्रतिमा बनाई जाती है) बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इस दिन अहोई अष्टमी भगवती की पूजा होती है।
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व्रत विधि

-सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें
-पूजा घर को साफ करें
-पूरा दिन व्रत करें
-शाम होने के बाद अहोई माता की पूजा होती है
-हाथ से अहोई मां का चित्र उकेरा जाता है(आजकल बाज़ार में बने बनाए भी मिल जाते हैं)
-चौकी पर अहोई माता और सईं का चित्र रखें
-कलश लगाकर, गणेश जी को विराजमान करें
-सच्चे मन से पूजा करें

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व्रत कथा

एक साहूकार के सात बेटे और सात बहुएं थीं। साहूकार की एक बेटी भी थी । एक बार उसकी बेटी अपनी सात भाभीयों के साथ मिट्टी लाने जंगल गई। मिट्टी का खुरपा चलाते वक्त बेटी से एक साही (Porcupine) का बच्चा मर गया। जब स्याहु ने ये देखा तो गुस्से से कहा की मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी। साहूकार की बेटी ने सब भाभीयों से विनती की कि वो मेरी जगह अपनी कोख बंधवा लें। तब छोटी भाभी तैयार हो गई और उसने कोख बंधवा ली। छोटी भाभी का जो भी बच्चा पैदा होता वो सातवें दिन मर जाता। ब्राह्मण से उपाय पूछा गया तो उसने कहा कि सुरही गाय की सेवा करो। छोटी भाभी ने गाय की काफी सेवा की तो गाय प्रसन्न होकर उसे लेकर स्याहु के पास चल पड़ी। वहां स्याहु ने छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है।

अहोई पूजा और व्रत के वीडियो देखें






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