मज़ाक करना कोई बुरी बात नहीं होती। हल्के-फुल्के झूठ बोलकर हम हमेशा किसी ना किसी को बेवकूफ बनाते हैं और हंसाते हैं। कई बार यह मज़ाक किसी को बुरा भी लग जाता है किन्तु अप्रैल फूल का दिन एक ऐसा दिन है जब हम किसी से भी अधाकारिक तौर पर मजाक कर सकते हैं। मजाक करने से ज्यादातर लोगों को खुशी मिलती है। किसी को बेवकूफ बनाना भी एक कला है। इसी कला का सम्मान करते हुए 1 अप्रैल को विश्व में अप्रैल फूल दिवस यानि अप्रैल फूल डे के नाम से मनाते हैं। इस दिन सहकर्मी, रिश्तेदार, दोस्त, परिवारजन कोई भी किसी को भी बेवकूफ यानि मूर्ख बना सकता है और सामने वाला बुरा भी नहीं मानता क्योंकि यह दिन अप्रैल फूल का दिन होता है। फूल का मतलब मूर्ख होता है। जब आप किसी को कोई झूठी बात कहें और वो उसे सच मान ले तो इसे मूर्ख बनाना कहते हैं। इसी दिन को अप्रैल फूल दिवस के रुप में जाना जाता है। अप्रैल फूल दिवस जॉर्जियाई कैलेंडर के चौथे महीने के पहले दिन लगभग सभी देशों में मनाया जाता है। हर साल, अप्रैल के पहले, लोग बाहर आते हैं और अपने दोस्तों और परिवार पर प्रशंसा करते हैं। इसे ऑल फूल दिवस भी कहा जाता है। दुनिया भर में यह सबसे अधिक प्रतीक्षित दिन है, जब लोगों को अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों, दुश्मनों और पड़ोसियों के साथ यह दिन मनाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। इस वर्ष अप्रैल फूल दिवस 1 अप्रैल सोमवार को मनाया जाएगा।

अप्रैल फूल डे का महत्व

यह दिन हंसी खुशी का दिन होता है। इस दिन का महत्व है कि लोग हल्के फुल्के मज़ाक के जरिए अपने दुख-दर्द को भूल जाते हैं और एक दूसरे के साथ इस दिन को मनाकर खुश होते हैं। यह दिन हंसी के बारिश के साथ आता है। लोग इस दिन अपने गमों को को भूल जाते हैं और मजाकिया अन्दाज़ में घुल मिल जाते हैं। यह दिन प्रियजनों के साथ खुशी साझा करने का भी दिन होता है। लोग चुटकुले, हंसी मजाक कर इस दिन का लुत्फ उठाते हैं।

1 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है अप्रैल फूल दिवस

वैसे अप्रैल फूल के दिन के इतिहास के बारे में कोई साक्ष्य तो नहीं है लेकिन इससे जुड़ी कई कहानियां प्रचलति है। प्राचीन यूरोप में नया साल हर वर्ष 1 अप्रैल को मनाया जाता था। 1582 में पोप ग्रेगोरी 13 ने नया कैलेंडर अपनाने के निर्देश दिए जिसमें न्यू ईयर को 1 जनवरी से मनाने के लिए कहा गया। रोम के ज्यादातर लोगो ने इस नए कैलेंडर को अपना लिया लेकिन बहुत से लोग तब भी 1 अप्रैल को ही नया साल के रूप में मानते थे। तब ऐसे लोगो को मूर्ख समझकर उनका मजाक उड़ाया। 1 अप्रैल और मूर्खता के बीच सबसे पहला दर्ज किया गया संबंध चॉसर के कैंटरबरी टेल्स (1392) में पाया जाता है। कई लेखक यह बताते हैं कि 16वीं सदी में एक जनवरी को न्यू ईयर्स डे के रूप में मनाये जाने का चलन एक छुट्टी का दिन निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन यह सिद्धांत पुराने संदर्भों का उल्लेख नहीं करता है। इस किताब की एक कहानी नन्स प्रीस्ट्स टेल के मुताबिक इंग्लैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च घोषित कर दी गई जिसे वहां की जनता ने सच मान लिया और मूर्ख बन बैठे। तब से 32 मार्च यानी 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे के रूप में मनाया जाता है। एक और कहानी के अनुसार 1915 की बात है जब जर्मनी के लिले हवाई अड्डा पर एक ब्रिटिश पायलट ने विशाल बम फेंका। इसको देखकर लोग इधर-उधर भागने लगे, देर तक लोग छुपे रहे। लेकिन बहुत ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी जब कोई धमाका नहीं हुआ तो लोगों ने वापस लौटकर इसे देखा। जहां एक बड़ी फुटबॉल थी, जिस पर अप्रैल फूल लिखा हुआ था। 1539 में फ्लेमिश कवि 'डे डेने' ने एक अमीर आदमी के बारे में लिखा जिसने 1 अप्रैल को अपने नौकरों को मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए बाहर भेजा। 1 अप्रैल 1698 को कई लोगों को "शेर की धुलाई देखने" के लिए धोखे से टावर ऑफ लंदन में ले जाया गया। लेखक कैंटरबरी टेल्स (1392) ने अपनी एक कहानी 'नन की प्रीस्ट की कहानी' में 30 मार्च और 2 दिन लिखा, जो प्रिंटिंग में गलती के चलते 32 मार्च हो गई, जो असल में 1 अप्रैल का दिन था। इस कहानी में एक घमंडी मुर्गे को एक चालक लोमड़ी ने बेवकूफ बनाया था। इस गलती के बाद कहा जाने लगा कि लोमड़ी ने 1 अप्रैल को मुर्गे को बेवकूफ बनाया। वहीं, अंग्रेजी साहित्य के महान लेखक ज्योफ्री चौसर का 'कैंटरबरी टेल्स (1392)' ऐसा पहला ग्रंथ है जहां 1 अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध जिक्र किया गया था। ऐसे तमाम किस्से हैं जिस वजह से पहली अप्रैल को बहुत फनी काम हुए और तो कुछ प्लान किए गए, जिस वजह से 1 अप्रैल को अप्रैल फूल-डे के तौर पर मजेदार तरीके से सेलिब्रेट किया जाने लगा।

अप्रैल फूल डे

कैसे मनाया जाता है अप्रैल फूल दिवस

अप्रैल फूल दिवस भारत के साथ पश्चिमी देशों में हर साल पहली अप्रैल को मनाया जाता है। कभी-कभी ऑल फूल्स डे के रूप में जाना जाने वाला यह दिन, 1 अप्रैल एक आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है लेकिन इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है। जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक मजाक और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं। इस दिन दोस्तों, परिजनों, शिक्षकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों आदि के साथ अनेक प्रकार की शरारतपूर्ण हरकतें और अन्य व्यावहारिक मजाककिए जाते हैं, जिनका उद्देश्य होता है बेवकूफ और अनाड़ी लोगों को शर्मिंदा करना। पारंपरिक तौर पर कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किये जाते हैं और अगर कोई दोपहर के बाद किसी तरह की कोशिश करता है तो उसे "अप्रैल फूल" कहा जाता है। ऐसा इसीलिये किया जाता है क्योंकि ब्रिटेन के अखबार जो अप्रैल फूल पर मुख्य पृष्ठ निकालते हैं वे ऐसा सिर्फ पहले (सुबह के) एडिशन के लिए ही करते हैं। इसके अलावा फ्रांस, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान रूस, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में जोक्स का सिलसिला दिन भर चलता रहता है। अप्रैल 1 बेवकूफ दिवस के रूप में दुनिया भर में सार्वभौमिक रूप से मनाया जाता है। कनाडा, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, रूस, नीदरलैंड और यूएस। में अप्रैल के मूर्ख दिवस के लिए उत्सव ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे कुछ देशों में दोपहर तक सीमित हैं, समारोह दिन के दौरान किया जाता है। स्कॉटलैंड में, उदाहरण के लिए, अप्रैल मूर्ख दिन दो दिनों के लिए मनाया जाता है। दूसरा दिन शरीर के पूर्ववर्ती क्षेत्र से जुड़े प्रशंसकों के खेल के लिए है और इसे ताइली डे भी कहा जाता है। "किक मी" चिह्न की उत्पत्ति इस अनुष्ठान के लिए खोजी जा सकती है। भारत में हालांकि अप्रैल बेवकूफ दिवस को पारंपरिक त्योहार के रूप में मनाया नहीं जाता है लेकिन इन दिनों यह लोकप्रिय हो रहा है और मुख्य रूप से युवाओं और बच्चों के बीच मनाया जाता है। लोग चुटकुले खेलना पसंद करते हैं और फिर "अप्रैल फूल" के रूप में जोर से चिल्लाते हैं। फ्रांस में, अप्रैल मूर्ख दिन को "पोइसन डी एवरिल" कहा जाता है। फ्रांसीसी बच्चे इस दिन एक विशेष खेल खेलते हैं। खेल का उद्देश्य उस व्यक्ति के बिना किसी व्यक्ति के पेपर मछली को टेप करना है। जब पीड़ित अपनी पीठ पर टैप की गई मछली को स्पॉट करता है, तो बच्चे "पोइसन डी एवरिल" चिल्लाते हैं!

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