भगवान राम की जन्मभूमि में हर साल एक बड़ा मेला लगता है। इस मेले को देखने दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। मेले से पहले पूजा होती है। ये पूजा यंत्रों की होती है। ऐसे यंत्र जिनकी वजह से लोग कमा रहे हैं और उनका परिवार चल रहा है, वो लोग इस दिन इनके सम्मान में पूजा करते हैं। इस दिन भगवान राम को भी पूजा जाता है। ये पर्व सारे ही उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन अलग अलग तबका अपने अपने हिसाब से इसे मनाता है।
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठ कर अपने उपकरणों और यंत्रों को पानी से साफ करके उनकी पूजा करते हैं। वहीं दुकानदार अपनी दुकान की और अन्य अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते हैं। मुख्यत: मां सरस्तवी का ध्यान किया जाता है। साथ ही मां लक्ष्मी और मां पार्वती की भी उपासना की जाती है। अधिकतर लोग इस दिन भगवान राम के मंदिर जाते हैं। इस बार ये मेला अक्टूबर को आ रहा है।

मेला

शाम के वक्त लगने वाले मेले की रौनक देखने वाली होती है। हर जगह रंगबिरंगी दुकानें ही दुकानें नज़र आती हैं। बड़े बड़े झूले, लकड़ी का सामान, खाने पीने की रेहड़ियां और रंगारंग कार्यक्रम। हर तरफ हंसी और मुस्कुराहटों की आवाजें, अलग अलग परिधानों में आए लोग सबका मन मोह लेते हैं। मेले में जाकर एक सेकेंड के लिये भी आप ऊबा हुआ महसूस नहीं करोगे।
 

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April (Chaitra/Baisakh)