बचपन एक ऐसी चीज है जिसके दौर से हर कोई गुजरा है। किसी भी बड़े इंसान को पूछें तो वो यही कहेगा कि उसे उसका बचपन लौटा दो। ना कोई फिक्र, ना कोई डर और ना ही छल कपट। बस खेल कूद और प्यार। यही तो चाहते हैं सब, लेकिन इस खेल कूद के बीच जिम्मेदारी भी बड़ी हो जाती है। जिम्मेदारी मां बाप की होती है कि उनका बच्चा बिगड़े नहीं। बचपन में अगर ग़लत आदतें पड़ गईं तो वो पूरी उम्र रहती हैं। भविष्य ख़राब हो जाता है और अगर अच्छी आदतों ने घेर लिया तो पूरी जिंदगी सफल हो जाती है। ऐसे में बचपन दोनो ही तरफ से काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी बचपन के लिये कुछ कविताएं आज हम आपको नज़र करने जा रहे हैं।

कविताएं

चाचा नेहरु के जन्मदिन पर ,
बाल दिवस है मनाया जाता
बाल दिवस लाता है खुशियों का त्यौहार
इसमें बच्चे पाते है बहुत ढेर सारा प्यार

नेहरु चाचा करते से हम बच्चो से प्यार
क्योकि बच्चो का दिन होता है पूरी तरह से साफ़
चाचा नेहरु का था सिर्फ एक ही सपना
पढने में आगे हो अपने देश का हर एक बच्चा बच्चा

क्योकि भारत के बच्चे है फ्यूचर इस देश के
एजुकेशन से होता कल्याण इनका
बाल दिवस के मौके पर सभी बच्चे को ये वादा है निभाना
चाचा नेहरु के सपने को सच करके है दिखाना



_____________

बचपन है ऐसा खजाना
आता है ना दोबारा
मुस्किल है इसको भूल पाना,
वोखेलना कूदना और खाना
मौज मस्ती में बखलाना

वो माँ की ममता और वो पापा का दुलार
भुलाये ना भूले वह सावन की फुवार,
मुस्किल है इन सभी को भूलना

वह कागज की नाव बनाना
वो बारिश में खुद को भीगना
वो झूले झुलना और और खुद ही मुस्कुराना .....

वो यारो की यारी में सब भूल जाना
और डंडे से गिल्ली को मरना
वो अपने होमवर्क से जी चुराना
और teacher के पूछने पर तरह तरह के बहाने बनाना
बहुत मुस्किल है इनको भूलना

वो exam में रट्टा लगाना
उसके बाद result के डर से बहुत  घबराना
वो दोस्तों के साथ साइकिल चलाना
वो छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना
बहुत मुस्किल है इनको भुलाना...

वो माँ का प्यार से मनाना
वो पापा के साथ घुमने के लिए जाना
और जाकर पिज्जा और बर्गेर खाना
याद आता है वह सब जबान
बचपन है ऐसा खजाना
मुस्किल है इसको भूलना


________________

वो बचपन  का  दौर  जो  बीता
जिंदगी का सबसे पल था वो मीठा
कितनी प्यारी लगती थीं दादी और नानी
जो हमको सुनाती थीं किस्से और कहानी
छोटी सी खुशीयों में हँसना रो देना चोट जो लगी
घरवाले  भी  हमसे  करते थे दिल्लगी
कहते मीठा फिर खिलाते जो तीखा
वो बचपन का दौर जो बीता
जिंदगी का सबसे पल था वो मीठा
कभी बनना था डॉक्टर कभी बनना था शायर
पल हर पल बदलते थे सपने
कोई थे भैया, कोई थे चाचा
हर कोई जैसे हों अपने
छोटी सी मुश्किल में चेहरा होता जो फीका
वो बचपन का दौर जो बीता
जिंदगी का सबसे पल था वो मीठा
पापा से डरना पर माँ से जो लड़ना
करके गुस्ताखी फिर उलझन में पड़ना
ना कोई गम था ना कोई डर था
बस खेल-खिलौनों का फिक़र था
बचपन का हर पल होता है अनूठा
वो बचपन का दौर जो बीता
जिंदगी का सबसे पल था वो मीठा

बाल दिवस कविता वीडियो





To read this article in English, click here
April (Chaitra/Baisakh)