भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। भारत धर्मनिरपेक्ष देश इसलिए कहलाता है क्योंकि यहां विभन्न धर्म, संस्कृतियां, मान्यताएं विद्धमान है। भारतीय कई देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। इन सभी देवी देवताओं के जन्म, मरण, और उनके पराक्रम के कई त्यौहार भारत में मनाए जाते हैं। जो भारतियों को जीवन जीने का नया संदेश देते हैं। भारत में मनाए जाने वाले हर त्योहार के पीछे एक विशेष कहानी, एक विशेष प्रथा छिपी होती है। भारत को हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म का जन्म स्थान माना जाता है। यह सभी धर्म देश के सबसे प्रचलित धर्मों में से एक हैं। भारत में मनाए जाने वाला प्रत्येक धर्म, त्योहार एवं रीति-रस्मों के पीछे उनके संप्रदायों की गहरी आस्था और गहरा विश्वास होता है। भारत के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक क्षेत्र में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च इत्यादि मौजूद है क्योंकि यहां के प्रत्येक राज्य में विभिन्न सम्प्रदायों और धर्मों के लोग रहते हैं। भारत के प्रत्येक राज्य में किसी खास धर्म, जाति को मानने वाले लोगों की बहुलता है जिसके कारण उस धर्म संप्रदाय से जुड़ी आस्था की चीजें अधिक मात्रा में उपलब्ध होती है। लेकिन साथ ही अन्य धर्म जाति के लिए भी यहां के हर क्षेत्र में उससे सबंधित देवी-देवताओं के स्थल उपलब्ध हैं।

भारत में हिंदू धर्म सबसे प्रमुख है यहां हिंदुओं की आबादी 80.5% है, इसके बाद इस्लाम धर्म का अनुसरण करने वाले लोग- 13.4% हैं, ईसाई धर्म को मानने वालों की संख्या - 2.3% है, सिख धर्म को मानने वाले - 1.9% है, वहीं बौद्ध धर्म का अनुसरण करने वाले - 0.8% हैं और अंत में जैन धर्म में आस्था रखने वालों की संख्या- 0.4% है।

हिंदू धर्म भारत का सबसे व्यापक और प्रमुख धर्म है, जिसमें 33 करोड़ देवी-देवाताओं की पूजा की जाती है, उनमें आस्था रखी जाती है। हिन्दू धर्म में उच्चारण के लिए पुरुष देवताओं को देव और महिला देवियों के लिए देवी का प्रयोग किया जाता है। इन्हीं देवी-देवताओं की पूजा हिन्दू धर्मों में प्रमुख है यहां के हर त्यौहार में किसी ना किसी देवी या देवता की पूजा अवश्य होती है।

हिंदुओं का मानना है कि पूरी सृष्टि को चलाने वाला एक ही देवता है जिसे परब्रहमा परमेश्वर या विष्णु कहा जाता है। अन्य सभी देवी-देवतागण इन्हीं का अंश हैं। हिन्दू मान्यतानुसार इस संपूर्ण सृष्टि के रचियता त्रिदेव है यानि ब्रहमा, विष्णु और महेश(शिव)। विष्णु सृष्टि के निर्माता है उन्होंने ही इस सष्टि का आरंभ किया है तो वहीं ब्रह्मा इस सृष्टि के संरक्षक है इसका लेखा-जोखा देखते हैं और शिव सृष्टि के विनाशक है जो एक क्षण में सब खत्म कर सकते हैं। सभी देवी-देवातओं में यह त्रिमूर्ति श्रेष्ठ है इन्हीं की आज्ञा से व्यक्ति का जन्म-मरण होता है। हिन्दू धर्म में पराशक्ति ब्रह्मा की शक्ति को दर्शती है। हिन्दु धर्म में पार शक्ति को देवियों की शक्ति माना जाता है जो पार्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रुप में सृष्टि का पालन-पोषण करती हैं। हिन्दु धर्म में देवी के 108 रुप माने गए हैं। यह 108 देवियां इन्हीं तीनों का रुप हैं।

हिंदू धर्म के अलावा भारत में सिख धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म का भी अनुसरण किया जाता है किन्तु इन तीनों ही धर्मों का जन्म हिंदू धर्म से हुआ है। इन तीनों धर्मों के पूजा-पाठ, रीत-रस्म एवं अनुष्ठान हिन्दु धर्म से अलग हैं।

इस्लाम धर्म पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं पर आधारित है, जिन्होंने अल्लाह के आदेश से उनकी दी हुई शिक्षाओं का विस्तार किया है। अल्लाह से प्राप्त पैगंबर के जो भी संदेश है वो हदीस में दर्ज किए गए हैं यह संदेश ही इस्लाम का आधार है। कुरान – इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र पुस्तक मानी जाती है। इस पुस्तक में ही मोहम्मद द्वारा प्राप्त अल्लाह के संदेश शब्दों के रुप में दर्ज हैं। इस्लाम धर्म में मूर्ति पूजा नहीं की जाती। यह मदिंर की जगह मस्जिद में अल्लाह की इबादत करते हैं। उन्हें नमाज़ अदा करते हैं।

माना जाता है कि भारत में ईसाई धर्म का विस्तार ईसा के बारह प्रमुख शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ने सन 52 ईसवी में केरल पहुंच कर किया था। कहते हैं कि उन्होंने उस काल में सर्वप्रथम कुछ ब्राह्मणों को ईसाई बनाया था। दक्षिण भारत में सीरियाई ईसाई चर्च सेंट थॉमस के आगमन का संकेत देता है। 16वीं सदी में पुर्तग़ालियों के साथ आये रोमन कैथोलिक धर्म प्रचारकों के माध्यम से उनका सम्पर्क पोप के कैथोलिक चर्च से हुआ। ईसाई धर्म के रुप में रोमन कैथोलिक धर्म, ओरिएंटल रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट भारत में मौजूद हैं।

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