हिंदू परंपराओं में देवताओं को प्रमुख माना गाया है। सृष्टि का संपूर्ण संचालन यह देवता ही करते हैं। हिंदू भक्ति में देवताओं को सरंक्षक माना जाता है। हिन्दू मान्यतानुसार हिंदु धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता बतलाए गए हैं। भारत में देवताओं के विभिन्न रुपों की पूजा की जाती है। भारत में जितने भी हिन्दू धर्मों के समूह एवं जातियां है सभी के अपने-अपने प्रमुख देवता है जो यह मानते हैं कि वो उनके समुदायों की रक्षा करते हैं। हिंदू धर्म में सर्वोच्च देवताओं की पूजा की जाती है। उन्हें मूर्ति या प्रतिमा के रुप में स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। भारत में प्रत्येक व्यक्ति के ईष्ट देवता होते हैं। व्यक्ति का विश्वास होता है कि जिस देवता की वो पूजा कर रहा है वो हर पल, हर घड़ी उसकी रक्षा करेंगें। हिंदू धर्म में जितने भी देवता हैं सभी की अलग-अलग महत्वता एवं विशेषता है।

हिंदू धर्म में सभी देवताओं को एक समान सम्मान दिया जाता है। सभी देवताओं की पूजा समान रुप से की जाती है। अद्वैत वेदान्त, भगवद गीता, वेद, उपनिषद्, आदि के मुताबिक सभी देवी-देवता एक ही परमेश्वर के विभिन्न रूप हैं। निराकार परमेश्वर की भक्ति करने के लिये भक्त अपने मन में भगवान को किसी एक प्रिय रूप में देखते है। ऋग्वेद के अनुसार, "एकं सत विप्रा बहुधा वदन्ति", अर्थात एक ही परमसत्य को विद्वान कई नामों से बुलाते हैं। यह देवता प्रत्यक्ष रुप में नहीं होते इसलिए हिंदू धर्म के अनुसार यह प्रत्येक व्यक्ति के मन के भीतर होते हैं। उनको आकार देने के लिए उनकी छवियों, मूर्तियों की पूजा की जाती है। मीमांसा के अनुसार सभी देवी-देवता स्वतन्त्र सत्ता रखते हैं और उनके ऊपर कोई एक ईश्वर नहीं है। इच्छित कर्म करने के लिये इनमें से एक या कई देवताओं को कर्मकाण्ड और पूजा द्वारा प्रसन्न करना ज़रूरी होता है। इस प्रकार का हिंदू धर्म शुद्ध रूप से बहु-ईश्वरवादी कहा जा सकता है। यहां एक के साथ कई ईश्वर माने जाते हैं। हिन्दू धर्म में तीन प्रमुख देवता माने जाते हैं ब्रह्मा, विष्णु और शिव। ब्रह्मा जहां सृष्टि के रचयिता है वहीं विष्णु सृष्टि के सरंक्षक एवं शिव विनाशकारी है।

माना जाता है कि जब-जब धरती पर पापा बढ़ता है तब-तब भगवान धरती पर आकर दुष्टों का अंत करते हैं। इसलिए भगवान विष्णु ने कई बार धरती पर मनुष्य के रुप मे जन्म लेकर धरती का उद्धार किया है। भगवान राम और कृष्ण को विष्णु का ही अवतार माना जाता है। भारत में देवताओं से जुड़े कई त्योहार मनाए जाते हैं। शिवरात्रि जहां भगवान शिव के विवाह से संबधित होती है वहीं राम नवमी और जन्माष्टमी भगवान राम और कृष्ण के जन्म से संबंधित है। होली एवं दिवाली बुराई पर अच्छाई के प्रतिक के रुप में मनाई जाती है। भगवान विष्णु ने कृष्ण और राम का रुप धर कर कंस और रावण का अंत किया था। गणेश चतुर्थी भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश को अराध्य मान कर मनाई जाती है।

व्यावहारिक रूप से भक्त देवताओं की पूजा उनके विशेष दिन पर विशेष प्रार्थना और अर्चना के साथ करते हैं। पूजा में विशेष अनुष्ठान किए जाते है। प्रत्येक देवता की प्रचलित कथा, भजन होते हैं जिसे उनके विशेष दिवस पर सुनाया व गाया जाता है। हिन्दू धर्म में प्रत्येक दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित होता है। सप्ताह के सातों दिन, साल के 365 दिन, महीने सभी किसी ना किसी देवता के पूजा, व्रत एवं अनुष्ठानों से जुड़ें होते हैं।

इन्द्र देवता

भैरव देवता

भगवान ब्रह्मा

भगवान गणेश

भगवान हनुमान

भगवान कामदेव

भगवान कृष्ण

कुबेर देवता

भगवान कार्तिकेय

देवर्षि नारद

भगवान राम

भगवान शिव

भगवान विष्णु

भगवान विश्वकर्मा

वरुण देवता/झुलेलाल

यमराज



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