हिन्दू पौराणिक मान्यताओं में बुध ग्रह का बहुत महत्व है। बुध सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे निकट स्थित ग्रह है। कहने को तो यह छोटा सा ग्रह है लेकिन ज्योतिष शास्त्र में बुध एक महत्वपूर्ण ग्रह के तौर पर गिना और देखा जाता है। इसे देवताओं का राजकुमार भी कहते हैं। ज्योतिष में कहा गया है बुध सही तो सब शुद्ध यानि सबकुछ सही रहता है लेकिन अगर यही बुध बिगड़ गया या नीची स्थित में चला गया तो सभी खुशियां बिगड़ सकती हैं। बुध ग्रह चंद्र (चंद्रमा) और तारा या रोहिणी के पुत्र माने जाते है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह व्यापारियों के व्यापार के संरक्षक देवता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बुध का काफी महत्व है। बुध, बुद्धि का कारक है। सामाजिक जीवन में, पारिवारिक जीवन में, आध्यात्मिक जीवन में या किसी अन्य क्षेत्र में अच्छे बुध वाला व्यक्ति उत्तम निर्णय लेकर सदैव उचित कार्य करता है। जिस व्यक्ति का बुध अच्छा होता है, वह अपने कामों की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करता है। यह व्यक्ति को विद्वता, वाद-विवाद की क्षमता प्रदान करता है। यह जातक के दांतों, गर्दन, कंधे व त्वचा पर अपना प्रभाव डालता है। यह कन्या राशि में उच्च एवं मीन राशि में नीच का होता है। बुध से जु़डा सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण धर्म अनुकूलनशीलता है। हर हाल में खुद को ढाल लेना सिर्फ बुध प्रधान व्यक्ति ही कर सकता है। बुध का दिन बुधवार होता है। इस दिन बुध देव की पूजा की जाती है। साथ ही बुध को हरा रंग अति प्रिय है।
बुध ग्रह

बुध की उत्पति

हिन्दू पौराणिक कहानियों में बुध की उत्पत्ति से एक कहानी जुड़ी है जिसके अनुसार चंद्रमा ने बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण कर लिया था। जिसके बाद वो गर्भवती हो गईं थी।गर्भवती होने पर तारा ने बृहस्पति के डर से गर्भ को इशीकास्तम्ब में विसर्जित कर दिया। इशीकास्तम्ब से जब दीप्तिमान एवं सुंदर बालक बुध का जन्म हुआ तो चंद्रमा एवं बृहस्पति दोनों ने ही उसे अपना पुत्र माना तथा जातकर्म संस्कार करना चाहा। जब यह विवाद बहुत अधिक बढ़ गया, तब ब्रह्मा जी ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए हस्तक्षेप किया। ब्रह्मा जी के पूछने पर तारा ने उसे चंद्रमा का पुत्र होना स्वीकार किया तथा ब्रह्मा जी ने उस बालक को चंद्रमा को दे दिया। चंद्रमा के पुत्र माने जाने के कारण बुध को क्षत्रिय माना गया, यदि उन्हें बृहस्पति का पुत्र माना जाता तो ब्राह्मण माना जाता। चंद्रमा ने बुध के पालन-पोषण का दायित्व अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी को दिया। रोहिणी द्वारा पालन-पोषण किए जाने के कारण बुध का नाम रौहिणेय भी है।

बुध का जीवन पर प्रभाव

बुध जब व्यक्ति की कुंडली के नीचले भाग में होता है या अशुद्ध होता है तो इंसान की जिंदगी में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। इंसान बीमारियों के चंगुल में फंस जाता है। शरीर की आभा खत्म होने लगती है। कर्ज से परेशान रहने लगता है और आर्थिक तौर पर बुरी तरह प्रभावित रहता है। बुध खराब होने पर पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान, यश बल सबसे गिरावट आने लगती है। इंसान शिक्षा में कमजोर हो जाता है, सूंघने की शक्ति घट जाती है, अपनी बातों के जरिए प्रभावशाली नहीं बन पाता है। बुद्धिवान होने के अंहकार से ग्रसित हो जाता है। कुंडली में बुध अगर कमजोर हो तो समस्याएं व्यापक हो जाती हैं। बुध के कमजोर होने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और वाणी में दोष आ जाता है। साथ ही बुध के कमजोर होने से इंसान की सुंदरता भी प्रभावित होती है। इसलिए कहा जाता है ग्रह कोई भी हो, छोटा हो बड़ा हो। उसका प्रभाव किसी भी दूसरे ग्रह से कमतर नहीं आंका जा सकता है। लेकिन अगर बुध सही हो तो जीवन में खुशियों की रौशनी फैली रहती है। दुखों का अंधकार दूर रहता है, मन प्रसन्न रहता है और जीवन में शांति बनी रहती है। बुध के शुद्ध होने से व्यक्ति सौंदर्यवान हो जाता है। उसकी आभा अनुपम हो जाती है, व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है जिसकी बातों को लोग ध्यान से सुनना पसंद करते हैं, आमतौर पर कुंडली में बुध की स्थिति ही तय करती है कि इंसान कैसा बोलता है और कैसा व्यवहार करता है या फिर उसकी बुद्धि और व्यक्तित्व कैसा है। बुध ग्रह से बलवान व्यक्ति अगर व्यापार करता है तो उसे खूब सफलता मिलती है। खासकर शेयर बाजार या रुपये से संबंधित कारोबार में विशेष लाभ मिलता है। बुध आपके पक्ष में रहे तो आपको मालामाल कर देगा। आपको यश बल कीर्ति से आकाश की अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचा देगा और अगर उसने नजर फेर ली तो आपको पाई पाई का मोहताज कर सकता है।

बुध का स्वरुप

बुध, बुध ग्रह के देवता है और चन्द्र (चांद) और तारा (तारक) का पुत्र है। वे व्यापार के देवता भी हैं और व्यापारियों के रक्षक भी। वे रजो गुण वाले हैं और संवाद का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें शांत, सुवक्ता और हरे रंग में प्रस्तुत किया जाता है। उनके हाथों में एक कृपाण, एक मुगदर और एक ढाल होती है और वे रामगर मंदिर में एक पंख वाले शेर की सवारी करते हैं। अन्य चित्रों में, उनके हाथों में एक राजदंड और कमल होता है और वे एक कालीन या एक गरुड़ अथवा शेरों वाले रथ की सवारी करते हैं। बुध बुधवार के मालिक हैं। आधुनिक हिन्दी, तेलुगु, बंगाली, मराठी, कन्नड़ और गुजराती में इसे बुधवार कहा जाता है; मलयालम और तमिल में इसे बुधन कहते हैं। वैवस्वाता मनु की बेटी, इला उनकी पत्नी है और पुरुरव उनका पुत्र है। बुध, अशलेषा के भगवान, ज्येष्ठ, और रेवती नक्षत्र आमतौर पर एक शांत ग्रहा है। बुध बौद्धिक शक्ति, खुफिया, संचार और विश्लेषणात्मक क्षमता को प्रभावित करता है। त्वचा, विज्ञान, गणित, व्यवसाय, शिक्षा और अनुसंधान बुध की ज़िम्मेदारी पर भी हैं।

बुध ग्रह की शांति के उपाय

बुध आमतौर पर एक लाभकारी ग्रह है, जब तक कि एक और नरक ग्रह उसके साथ नहीं जुड़ जाता। यदि बुध का सह-ग्रह नरक है तो वह भी नरक हो जाता है। मिथुन (मिथुन) और कन्या (कन्या) बुध द्वारा शासित है। यह कन्या में ऊंचा है और मीना (मीन) में पड़ता है। बुध सूर्य और शुक्र के साथ मित्रवत है, चंद्रमा के प्रति शत्रुतापूर्ण और अन्य ग्रहों की ओर तटस्थ है। बुध की शांति के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गये हैं। बुध की शांति के लिए स्वर्ण का दान करना चाहिए। हरा वस्त्र, हरी सब्जी, मूंग का दाल एवं हरे रंग के वस्तुओं का दान उत्तम कहा जाता है। हरे रंग की चूड़ी और वस्त्र का दान किन्नरो को देना भी इस ग्रह दशा में श्रेष्ठ होता है। बुध ग्रह से सम्बन्धित वस्तुओं का दान भी ग्रह की पीड़ा में कमी ला सकती है। इन वस्तुओं के दान के लिए ज्योतिषशास्त्र में बुधवार के दिन दोपहर का समय उपयुक्त माना गया है। बुध की दशा में सुधार हेतु बुधवार के दिन व्रत रखना चाहिए। गाय को हरी घास और हरी पत्तियां खिलानी चाहिए। ब्राह्मणों को दूध में पकाकर खीर भोजन करना चाहिए। बुध की दशा में सुधार के लिए विष्णु सहस्रनाम का जाप भी कल्याणकारी कहा गया है। रविवार को छोड़कर अन्य दिन नियमित तुलसी में जल देने से बुध की दशा में सुधार होता है। अनाथों एवं गरीब छात्रों की सहायता करने से बुध ग्रह से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मौसी, बहन, चाची बेटी के प्रति अच्छा व्यवहार बुध ग्रह की दशा से पीड़ित व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है। अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।

बुध ग्रह से जुड़े तत्व

बुध का दिन: बुधवार
रंगः हरा
धातु: पीतल
रत्न: एमराल्ड
दिशा: उत्तर
मौसम: शरद ऋतु
तत्व: पृथ्वी

बुध मंत्र

'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'

बुध गायत्री मंत्र

"ओम बुधग्राय विदामा, इंदु पुत्रया धिमही, तन्नो सोम्या प्रचोडययत"

बुध का नवग्रह मंत्र

ऊं नमो अर्हते भगवते श्रीमते मल्लि तीर्थंकराय कुबेरयक्ष |
अपराजिता यक्षी सहिताय ऊं आं क्रों ह्रीं ह्र: बुधमहाग्रह मम दुष्टसग्रह,
रोग कष्ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट् ||

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