वेलेंटाइन डे का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक प्यार भरा दिन याद आ जाता है। वो दिन जब प्रेमी-प्रमिका अपने प्यार का इजाहार करते हैं। अपने साथी के साथ होते हैं। वेलेंटाइन डे प्यार से जुड़ा दिन है जिसे पूरे विश्व में मनाया जाता है। कई देशों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। लेकिन वेलेन्टाइन डे मनाने के पीछे संत वेलेंटाइन का इतिहास जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, तीन अलग-अलग व्यक्ति हैं जो वेलेंटाइन के नाम से शहीद हैं। कैथोलिक विश्वकोश के अनुसार, शुरूआत में 3 ईसाई संत थे। पहले रोम में पुजारी थे, दूसरे टर्नी में बिशप थे और तीसरे थे सेंट वेलेंटाइन, जिनके बारे में कोई इतिहास अभी तक सामने नहीं आया है, सिवाय इसके कि वे अफ्रीका में मिले थे। हैरानी की बात यह है कि तीनों वैलेंटाइन्स 14 फरवरी के दिन शहीद हुए थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रोम के सेंट वेलेंटाइन माने जाते हैं। इन सभी संतो ने मानव क्ल्याण के लिए अपनी जान दे दी। यह कहने को तो अलग-अलग देश के थे किन्तु तीनों की मृत्यु एक ही दिन 14 फरवरी को हुई थी। इन संतो के शहादत के दिन को प्रेमी जोड़े वेलेंटाइनस डे के रुप में मनाते हैं। इन तीनों संतो की अलग-अलग कथाएं जिसने इन्हें महान संतो की उपाधी दी है। बताया जाता है की कई शुरुआती ईसाई शहीदों को वेलेंटाइन नाम दिया गया था। वैलेंटाइन डे को 14 फरवरी को मनाया गया है वेलेंटाइन रोम और वेलेंटाइन टर्नी रोम का वेलेंटाइन रोम में एक पुजारी था, जो 269 में शहीद हो गया था और पोल गैलसियस द्वारा संतों के कैलेंडर में 496 में जोड़ा गया था और उसे वाया फ्लुमिनिया में दफनाया गया था। सेंट वेलेंटाइन के अवशेष चर्च और रोम में सान वैलेंटिनो के गुलदस्ते में रखा गया था, जो “मध्य युग में एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बने रहे जब तक सेंट वेलेंटाइन के अवशेष निकोलस चतुर्थ के प्रचलित प्रमाण के दौरान सांता प्रिसेडे के चर्च में स्थानांतरित नहीं किए गए थे। सेंट वेलेंटाइन का फूल-ताज पहनाया खोपड़ी कोसमिदिन, रोम में सांता मारिया के बेसिलिका में प्रदर्शित किया गया है। अन्य अवशेष आयरलैंड में डब्लिन, व्हाइटफ़ायर स्ट्रीट कारमेलिट चर्च में पाए गये हैं।
सन्त वेलेंटाइन

संत वेलेंटाइन: रोम के पवित्र पुजारी

संत वेलेंटाइन उस समय प्रसिद्ध हुए जब तीसरी सदी में यूरोप के रोम को पूरी दुनिया में काफी शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था और उस समय रोम का राजा था। क्लॉडियस द्वितीय जो कि एक जिद्दी, क्रूर और निर्दय तरह का राजा था। उसने अपने अत्याचार से सभी लोगों पर अपना हक जमा रखा था। अपनी क्रूरता से वह पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य फैला रहा था। एक बार क्लॉडियस द्वितीय ने एक विश्लेषण करके यह पाया कि उसके राज्य में अविवाहित युवा लोग शादीशुदा युवाओं से ज्यादा ताकतवर थे। क्लॉडियस मानता था कि अविवाहित पुरुष विवाहित पुरुषों की तुलना में ज्यारदा अच्छें सैनिक बन सकते हैं। इस वजह से उसने अपनी सभा में एक बड़ा ही क्रूर निर्देश सुनाया और साम्राज्य में सैनिकों और अधिकारियों के विवाह करने पर ही रोक लगा दी। इस निर्देश से राज्य की जनता दुखी हो गयी उस समय रोम में एक बड़े कैथोलिक पादरी रहा करते थे उनका नाम संत वैलेंटाइन था उनको क्लॉडियस का यह फरमान जरी करना उचित नहीं लगा। उन्होंने इस आदेश का विरोध किया। संत वैलेंटाइन ने सम्राट क्लॉडियस के आदेश की अवहेलना करते हुए कई सैनिकों और अधिकारियों के गुप्त विवाह कराया। राजा क्लॉडियस को जब वेलेंटाइन की इस बात का पता लगा तो वो गुस्से से भर गया।उसने फ़ौरन संत वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर कारावास में डाल दिया और मौत की सजा सुना दी। रोम के लोगों का मानना है की वेलेंटाइन के पास एक दिव्य शक्ति थी जिसके इस्तेमाल से वो लोगो को रोगों से मुक्ति दिला सकते थे। जब सेंड वैलेंटाइन डे कारावास में रह रहे थे तब वहां के जेलर जिसका नाम ऑस्ट्रियस था वो वेलेंटाइन के पास आया और उनसे विन्नती करने लगा की उसकी अंधी बेटी की आँखों की रौशनी को अपने दिव्य शक्ति से ठीक कर दे। संत वेलेंटाइन एक नेक दिल के इंसान थे और वो सबकी मदद करते थे इसलिए उन्होंने जेलर की भी मदद की और उनकी अंधी बेटी की आँखों को अपनी शक्ति से ठीक कर दिया। उस दिन के बाद से वेलेंटाइन और ऑस्ट्रियस की बेटी के बीच गहरी दोस्ती हो गयी और वो रोज उनसे मिलने आने लगी इसी दौरान जेलर की बेटी से वेलेंटाइन को प्यार हो गया। कुछ दिन बाद जब सेंड वैलेंटाइन को फांसी दी गई तो उन्होंने फांसी के पहले उस लड़की के पास एक पत्र भेजा उस प्रेम पत्र में बस इतना लिखा था ” तुम्हारा वैलेंटाइन”। माना जाता है कि 14 फरवरी सन 269 के दिन ही वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा दिया गया।यही से अपने प्रिय लोगों की वैलेंटाइन कहने की परंपरा भी शुरू हुई। 14 फरवरी वो दिन था जब एक संत ने पूरी दुनिया को प्यार और मोहब्बत की ताकत समझा कर इस दुनिया से विदा ले लिया था। तब से 14 फरवरी सेंट वेलेंटाइंस डे यानी कैथोलिक संत वैलेंटाइन का शहीद दिवस है और यह रोम के प्रमुख त्योहारो में से एक के रुप में मनाया जाता है।

संत वेलेंटाइन: टर्नी के बिशप

वहीं दूसरे वेलेंटाइन टर्नी के बिशप थे। टर्नी का वेलेंटाइन इंटरमना का बिशप बन गए और कहा गया कि वह 273 में सम्राट ऑरेलियन के उत्पीड़न के दौरान शहीद हो गए थे। उन्हें वाया फलामिनिया पर दफन किया गया है, लेकिन रोम के वेलेंटाइन से अलग स्थान पर है। उनका अवशेष टेरनी के बासीलीकिका सेंट वेलेंटाइन में हैं (बासीलीक डी सैन वैलेंटिनो)। जैक बी ओरुच कहता है कि “दो संप्रदायों के कृत्यों का सार लगभग हर चर्च और यूरोप के मठ में थे।” कैथोलिक एसाइक्लोपीडिया भी एक वैलेंटाइन नामक तीसरा संत का बोलता है जिसे फरवरी की तारीख के तहत शुरुआती शहीदों में वर्णित किया गया था। वह कई सहयोगियों के साथ अफ्रीका में शहीद हुए थे, लेकिन उनके बारे में और कुछ नहीं पता है। सेंट वेलेंटाइन का सिर न्यू मिन्स्टर, विन्चेस्टर के अभय में संरक्षित था, और सम्मानित किया गया था। जैक बी ओरुच कहते है कि “दो संप्रदायों के कृत्यों का सार लगभग हर चर्च और यूरोप के मठ में थे।” कैथोलिक एसाइक्लोपीडिया भी एक वैलेंटाइन नामक तीसरा संत को बताता है है जिसे फरवरी की 14 तारीख के तहत शुरुआती शहीदों में वर्णित किया गया था। वह कई सहयोगियों के साथ अफ्रीका में शहीद हुए थे, लेकिन उनके बारे में और कुछ जानकारी नहीं है।

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