ईस्टर ईसाइयों का एक और महत्वपूर्ण त्यौहार है। ईस्टर या पुनरुत्थान रविवार, जिसे पासच भी कहा जाता है, एक एक उत्सव है जो मृत से जीवित हुए यीशु मसीह की जागृति का जश्न मनाने का अवसर देता है। इसे गुड फ्राइडे के तीसरे तीन यानी रविवार को मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन ईसा मसीह का पुर्नजन्म हुआ था और और वो एक बार फिर से अपने शिष्यों के साथ रहने लगे थे, लेकिन सिर्फ 40 दिनों के लिए, इसके बाद वो हमेशा के लिए स्वर्ग चले गए थे। इसीलिए ईस्टर को मृतोत्थान दिवस या मृतोत्थान रविवार भी कहते हैं। ईस्टर के पर्व को ईस्टर काल भी कहा जाता है, क्योंकि ईइसा मसीह के धरती पर 40 दिनों तक रहने के उपलक्ष्य में इसे काल के रुप में मनाया जाचा है। किन्तु आधिकारिक तौर पर ये 50 दिनों तक चलता है। हालांकि ईसाइयत से अलग ईस्टर को अप्रैल के महीने में नई फसल के त्योहार की तरह भी मनाया जाता है। 'ईस्टर' शब्द जर्मन के 'ईओस्टर' शब्द से लिया गया, जिसका अर्थ है 'देवी'। इसे किसानों का त्योहार भी मानते हैं। इस पूरे 40 से 50 दिनों के दौरान व्रत, प्रार्थनाएं और प्रायच्छित किया जाता है। ईस्टर के दौरान यीशु के सामने असंख्य मोमबत्तियां जलाई जाती है। इन मोमबत्तियां को घरों में जलाना शुभ माना जाता है। बताया जाता है कि रोमन के पादरियों ने ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा कर मार दिया था। जिससे जनता काफी विचलित हुई थी। जनता को दुखी देख कर ईसा मसीह तीन दिन बाद वापस जिंदा हुए थे। इस खुशी में ईस्टर का त्योहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार ईस्टर का त्योहार 21 अप्रैल रविवार को मनाया जाएगा।

ईस्टर का त्योहार

ईस्टर की परंपराएं

ईस्टर से जुड़ी हुई कई परंपराएं ईसाई समुदायों में काफी प्रचलित है। ईस्टर के त्योहार से पहले सप्ताह में ईस्टर ट्रिड्यूम और मौंडी जैसे दिन होते हैं। यह यहूदियों उगाही जा रही फसल से भी जुड़ा होता है। ईसाई समुदाय में ईस्टर परंपराएं व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। कुछ लोग बधाई देते हैं तो कुछ ईस्टर के दिन अंडे को सजाते हैं। कुछ लोग सूर्योदय सेवाओं में भाग लेते हैं और कुछ ईस्टर परेड पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ईस्टर के दिन ज्यादातर अवकाश होता है। किन्तु जहां अवकाश नहीं होता वहां 3 घंटे के लिए कार्य बंद कर दिया जाता है क्योंकि यीशु को 3 बजे सूली पर चढ़ाया गया था। एक सामान्य रीति-रिवाज में सात विशिष्ट तत्व शामिल होते हैं जो क्रूस पर रहते हुए मसीह के सात उच्चारण का प्रतिनिधित्व करते हैं।

क्या है गुड फ्राइडे

ईस्टर से 3 दिन पहले यानि शुक्रवार को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है। कुछ लोगों को शुभ शुक्रवार कहना पसंद नहीं है क्योंकि शुभ का मतलब अच्छा होता है जबकि इसी दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था। किन्तु ईसाई धर्म के लोगों को यह दिन शुभ इसलिए लगता है क्योंकि ईसा मसीह को शहादत प्राप्त हुई थी। कुछ लोगों का मानना है कि "अच्छा" शब्द "भगवान" या भगवान के शुक्रवार से विकसित हुआ है।गुड फ्राइडे गोवा कैथोलिकों के बीच याद का दिन है। यह लेंट सीजन का अंत है, कैथोलिकों के जीवन में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह फरवरी से मार्च तक 40 दिनों की निरंतर अवधि के लिए मनाया जाता है, जो एश बुधवार से शुरू होता है और गुड फ्राइडे के साथ समाप्त होता है। जिसके उसके बाद ईस्टर रविवार होता है। माना जाता है कि मूल रूप से भगवान के शुक्रवार के रूप में जाना जाता है, माना जाता है कि वर्तमान अभिव्यक्ति 10 वीं या 11 वीं शताब्दी में उभरी है। ईसाई की किंवदंती के अनुसार, यीशु मसीह आधुनिक इज़राइल के एक शहर नासरत से थे। लोगों उन्हें भगवान का पुत्र मानते थे। हालांकि, कुछ उच्च अधिकारियों और यहूदी पुजारियों ने महसूस किया कि वह अपने अधिकार का उपयोग करने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने यहूदा के नाम के 12 प्रेरितों में से एक की मदद से मसीह के खिलाफ एक साजिश रची। लोगों को गुमराह करने के, उन्हें सम्राट को कर चुकाने और भगवान के दूत होने का दावा करने के आरोप में, गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन, उन्हें पुजारी, कानून और बुजुर्गों के शिक्षकों समेत परिषद के समक्ष पेश किया गया और फिर उनके खिलाफ आरोपों के बारे में पूछताछ की गई थी। उन्हें सभी आरोपो पर दोषी पाया गाय। उन्होंने यीशु को रोमन गवर्नर के सामने प्रस्तुत किया, जिन्होंने उन्हें निंदा करने का कोई कारण नहीं देखा। फिर भी पुजारी अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनकी शिक्षाएं थीं, जो यहूदिया के सभी दंगों के लिए जिम्मेदार थीं। साथ ही, उन्होंने अपने एक पुरुष को रिहा करने के लिए अनुरोध किया, जिसे अपराध के लिए कैद किया गया था। राज्यपाल ने उनसे अपील की, दोहराते हुए कि मसीह ने कोई गलती नहीं की है। जब पादरी सहमत नहीं थे, तो उन्होंने यीशु मसीह को उनके साथ काम करने के लिए सौंप दिया। भीड़ ने उन्हें सूली पर चढ़ाने के लिए कहा। उन्हें कांटों का मुकुट पहनाया गया। भीड़ में यहूदियों के राजा के रूप में मजाक उड़ाया गया था। उसके कंधों पर एक विशाल लकड़ी का क्रॉस लगाया गया था, और उन्हे सूली पर चढ़ा दिया गया। अपनी आखिरी साँस लेने से पहले, यीशु ने अपने पिता से उन्हें माफ करने के लिए कहा जो उनकी मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार थे, क्योंकि वे अपने पाप की परिमाण से अनजान थे। माना जाता है कि यीशु ने दोपहर में 3 बजे अपने प्राण त्याग दिए थे।

ईस्टर में अंडे का महत्व

ईस्टर में अंडे का खास महत्व है क्योंकि, जिस तरह से चिड़िया सबसे पहले अपने घोसले मे अंडा देती है। उसके बाद उसमें से चूजा निकलता है ठीक उसी तरह अंडे को एक शुभ स्मारक माना है और ईस्टर में खास तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाता है। कहीं चित्रकारी करके, कहीं दूसरे रूप में सजाकर, इसे गिफ्ट के रूप में एक दूसरे को दिया भी जाता है। यह एक शुभ संकेत होता है जो लोगों को अच्छा जीवन जीने के लिए नए उमंग से भरने का संदेश देता है। ईस्टर अंडे और बनी एस्टर खरगोश या ईस्टर बनी ईस्टर का लोककथात्मक प्रतीक है जो ईस्टर अंडे लेकर एक खरगोश दर्शाता है। ईस्टर अंडे पुनर्जन्म और प्रजनन का प्रतीक हैं। कुछ लोगों का मानना था कि सजाने वाले अंडे अपने घरों में समृद्धि लाने का एक जरिया है। एक अनुष्ठान के एक हिस्से के रूप में, घर के सभी अंडे लेंट शुरू होने के महीने से पहले खाए जाते हैं। ऐसा उन्हें खराब होने से बचाने के लिए किया जाता है क्योंकि उत्सव के दौरान अंडा खाने के लिए मना किया जाता है। रूस और पोलैंड जैसे देशों में, ईस्टर अंडे एक नए जीवन का प्रतीक हैं।
ईस्टर का त्योहार

ईस्टर उत्सव

ईस्टर सन्डे को मनाने के लिए ईसाई समुदाय के लोग रात्रि को गिरजाघर में एकत्रित होकर मोमबत्ती जलाते हैं और पूरी रात ईसा मसीह का नाम लेकर तथा उनके द्वारा दिए गये सन्देश को याद करते हुए जागरण करते हैं। गोवा के पणजि में ईस्टर दिवस पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सैकड़ों भक्त गोवा कैथोलिक, मैरी इमैकुलेट कॉन्सेप्शन के पंजिम चर्च में सामूहिक सभा सुनने आते हैं। यीशु के लिए जुलूस निकालते हैं। ईस्टर की आराधना प्रातःकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था और उन्हें सबसे पहले मरियम मगदलीनी नामक महिला ने देख अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था। इसे सनराइज सर्विस कहते हैं। धर्म विशेषज्ञों के अनुसार पुराने समय में किश्चियन चर्च ईस्टर रविवार को ही पवित्र दिन के रूप में मानते थे। किंतु चौथी सदी से गुड फ्रायडे सहित ईस्टर के पूर्व आने वाले प्रत्येक दिन को पवित्र घोषित किया गया था। स्टर का मुख्य प्रतीक एक अंडा होता है. ईस्टर नवीनीकरण, उत्सव, कायाकल्प, पृथ्वी पर रहने वाले लोगों और हर इंसान के लिए उन्नति का प्रतीक है। इस दिन अंडों को सजाया जाता है। और एक दूसरे को गिफ्ट दिया जाता है जो कि एक शुभ संकेत और उन्नति की ओर इशारा करता है. ईस्टर के दिन लोग चर्च और घरों में मोमबत्तियां जलाते हैं. अन्य देशों की तरह भारत में भी इसे धूमधाम से मनाया जाता है. बिना रंगीन अंडो के ईस्टर का मजा नहीं। परंपरागत रूप से ये अंडे माता पिता छिपाते हैं और बच्चों को इन्हें ढूंढना होता है। ईसाई धर्म में अंडे पुनरुत्थान का प्रतीक हैं. विज्ञान में यह बेतुकी बात है कि एक खरगोश ईस्टर के अंडे लाता है। लेकिन यह वसंत से जुड़ा है। पहले ऐसे उपहार लाने वाले प्राणियों में मुर्गियां या सारस शामिल थे। ईस्टर पर सजी हुई मोमबत्तियां अपने घरों में जलाना तथा मित्रों में इन्हें बांटना एक प्रचलित परंपरा है।

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