हाथी महोत्सव जयपुर

हाथियों को "पुराणिक" युग से कीमती और राजसी माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में हाथी की सर्वोच्चता को भी अच्छी तरह से चित्रित किया गया है। राजा महाराजाओं की शाही सवारियां हाथियों पर ही निकाली जाती थी। हाथी राजओंकी शान होता था। किंवदंतियों के अनुसार, समुद्र मंथन ’के समय जब दानव और देवता“ समुद्र मंथन ”में व्यस्त थे तब देवताओं को "ऐरावत" नामक एक हाथी को प्राप्त करने का सौभाग्य मिला जो बाद में इंद्र का दिव्य वाहन बन गया। तब से हाथियों को लेकर कई त्योहार एवं उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

हाथियों के त्योहारों के रुप में राजस्थान के जयपुर शहर में गज महोत्सव या हाथी महोत्सव बहुत ही शानदार ढंग से मनाया जाता है। यह जयपुर छगन स्टेडियम में आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम है, जहाँ लोग बड़ी संख्या मेंभव्यता के साथ इस अवसर को मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस महोत्सव का आयोजन मार्च के महीने में होली वाले दिन किया जाता है। गज महोत्सव में मुख्य रूप से हाथी, ऊंट और घोड़े आकर्षण का केन्द्र होते हैं। हाथी महोत्सव में हाथी अपने नृत्य द्वारा महोत्सव में आए लोगों का मनोरंजन करते हैं।

कैसे मनाते हैं हाथी महोत्सव

हाथी महोत्सव के दौरान हाथियों की सेवा का सिलसिला अलसुबह से ही शुरू हो जाता है। सुबह महावत हाथियों को नहलाते हैं और उनके नाखून काटकर उन्हें सजाया-संवारा जाता है। तेल से मालिश के बाद विशेषज्ञों व चिकित्सक हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। इसके बाद उनका प्रिय भोजन और फल खिलाए जाते हैं। आम तौर पर हाथियों को दिए जाने वाला भोजन निर्धारित है, लेकिन महोत्सव के दौरान उन्हें भरपेट भोजन कराया जाता है।

जिसके बाद शुरू में हाथियों की शोभायात्रा निकाली जाती है। इसके बाद गज श्रृंगार प्रतियोगिता होती है। इसमें महावत हाथियों को फूलों व चित्रों से आकर्षक सजाते हैं। पायल पहने हाथियों के चलने से बना संगीत सबको आनंदित कर देता है।

यही नहीं हाथी महोत्सव में कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है। जिसमें से मटका रेस, रस्साकसी, सांस्कृतिक नृत्य आदि कई प्रतियोगिताएं होती है। जयपुर हाथी उत्सव शायद एकमात्र ऐसा फेस्टिवल है जिसमें हाथियों को प्रमुख महत्व दिया जाता है।

त्योहार के दौरान, जयपुर हाथियों, नर्तकियों और संगीतकारों के साथ जीवंत होता है, जो दुनिया भर से आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। हाथी अपनी सजावट के साथ राजसी अनुभव प्रदान करते हैं और इस त्यौहार की सबसे खास बात यह है कि इस त्यौहार में शामिल होने वाले सभी हाथी मादा हाथी होते हैं। यह उत्सव भारतीय संस्कृति का जीवंत उदाहरण है।

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