गणगौर उत्सव बहुत धूम-धाम से राजस्थान में मनाया जाता है। होली के दूसरे दिन से ही गणगौर का त्योहार आरंभ हो जाता है जो पूरे 18 दिनों तक लगातार चलता रहता है। गणगौर एवं गौरी पूजा की कई कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कहानियों को नीचे बताया गया है।

 
गणगौर की कहानियां

गणगौर माता की कहानी

राजा के बोया जौ – चना, माली ने बोई दूब, राजा का जौ – चना बढ़ता जाय माली की दूब घटती जाये। एक दिन माली बगीचे की घास में जाकर कम्बल ओढ़ कर छुप गया। छोरिया जब दूब लेने आई, दूब तोड़ कर जाने लगी तो माली ने उनसे उनके हार, डोरे खोस लिए। छोरिया बोली, क्यों तो हार खोसे, क्यों डोरे खोसे, जब सोलह दिन की गणगौर पूरी हो जायेगी तब हम पुजापा [ पूजा का सामान ] दे जायेंगे।

सोलह दिन पुरे हुए तो छोरिया आई  पुजापा देने और उसकी माँ से बोली तेरा बेटा कहा गया। माँ बोली वो तो गाय चराने गयो हैं, छोरिया  ने कहा यह पुजापा कहा रखे तो माँ ने कहा, ओबरी गली में रख दो। बेटो आयो गाय चराकर, और माँ से बोल्यो छोरिया आई थी,माँ बोली आई थी, पुजापा लाई थी।

हा बेटा लाई थी ओबरी गली में रख्यो हैं। ओबरी ने एक लात मारी, दो लात मारी पर ओबरी नहिं  खुली। बेटे ने माँ को आवाज लगाई और बोल्यो माँ ओबरी तो नही खुले तो माँ बोली बेटा ओबरी नही खुले तो पराई जाई को कैसे ढाबेगा [ रखेगा ], माँ पराई जाई तो ढाब लूँगा पर ओबरी नही खुले। माँ ने आकर गणगौर माता के नाम का रोली, मोली, काजल का छीटा लगाया और ओबरी खुल गई। ओबरी में ईशर गणगौर बैठे,हीरे मोती ज्वारात के भंडार भरिये पड़े।

हे गणगौर माता ! जैसे माली के बेटे को ठुठी वैसे सबको ठुठना, कहता ने, सुनता ने,हुंकारा भरता ने, म्हारा सारा परिवार ने।

 
गणगौर की कहानियां

सूरज रोटी की कहानी

दो माँ बेटी थी। सूरज भगवान का व्रत करती थी। सूरज रविवार का व्रत आया माँ को किसी आवश्यक कार्य से बाहर जाना पड़ा उसने अपनी बेटी से कहा बेटा तू दो रोट बना लेना। बेटी ने दो रोट बना लिया उसी समय एक जोगी भिक्षा मांगने आया उसने माँ के रोट में से एक टुकड़ा तोड़ कर जोगी को दे दिया। माँ बाहर से आई और बोली मेरा रोट दे तो बेटी बोली माँ एक जोगी भिक्षा मांगने आया था आपके रोट में से थौड़ा टुकड़ा उसको दे दिया। ऐसा सुनते ही उसकी माँ ने जिद्ध पकड़ ली और सारा दिन कहने लगी ‘ घी रोटो दे,घी रोटो मेली कोर दे, पुरो दे पर म्हारों दे। सब ने यही सोचा की यह पागल हो गई और सब जनों ने मिलकर उसे एक अँधेरी कोठरी में बंध कर दिया। लडकी का एक राजकुमार से विवाह हो गया। उसके पति ने जिद्ध कर ली की मेरे को अपने ससुराल जाना हैं। बेटी के मायके में और कोई नहीं था, जब उसने सूरज भगवान से विनती की मेरे को सवा पहर का मायका दे दो।

जब सूरज भगवान ततास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गये। उसके बाद सूरज भगवान की कृपा से जंगल में महल बाग  बगीचे, माता – पिता,भाई,बहन, भाभी, भतीजे  सब बेटी जवाई के आदर सत्कार करने लगे| अपना प्यार लुटाने लगे। सवा पहर का समय बीतने लगा पर जवाई जी का मन नहीं भरा बेटी बोली चलो देर हो रही हैं उसको पता था सवा पहर होते ही सब खत्म हो जायेगा| वो अपने पति को लेकर जाने लगी| उसके पति ने अपने एक पाँव की मोचड़ी वही छोड़ दी| आधे रास्ते गया और बोला मेरी मोचड़ी वही रह गई। उसने बहुत समझाया आपके क्या कमी हैं पर वह नहीं माना वापस जाकर देखा तो वहाँ जोर से हवा चल रही,जहाँ भोजन बनाया वहा राख उड़ रही|

पेड़ के नीचे उसकी मोचड़ी रखी थी| उसके पति ने उसका हाथ पकड़ा और पूछा ये क्या जादू किया तुमने, तब उसने अपने पति को सारी बात बताई की उसके पियर [ मायका ] में कोई नहीं हैं उसकी एक बावली माँ हैं| ये तो सूरज भगवान ने उसको सवा पहर का मायका दिया| उसने और उसके पति ने सूरज भगवान से प्रार्थना की और सूरज भगवान की कृपा से उसकी माँ ठीक हो गई और उसको बहुत सारी धन दौलत देकर विदा किया|

हे सूरज भगवान जैसा लडकी को दिया वैसा सबको देना, कहानी कहता न, सुनता न, म्हारा सारा परिवार न|

 
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