भारत में यूं तो कई त्यौहार मनाए जाते हैं। किन्तु भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में गुड फ्राइडे को मनाया जाता है। गुड फ्राइडे का अर्थ है शुभ शुक्रवार। यह वह दिन है जिस दिन पर यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यीशु मसीह का जन्म इजरायल के एक छोटे से शहर नेज़ेथ में मैरी की कोख से हुआ था। वह ईसाई धर्म के संस्थापक थे, जो दुनिया के सबसे बड़े धर्मों में से एक है। यीशु को भगवान का अवतार माना जाता है और इस दिन उनकी शिक्षाओं को वर्णित जाता है। ईसा के पुनरुत्थान के तीन दिन पूर्व पड़ने वाले शुक्रवार को गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाता है। यह अप्रैल माह के तीसरे शुक्रवार को होता है। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। इस दिन भक्तगण उपवास के साथ प्रार्थना और मनन करते हैं। इस दिन चर्च एवं घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है। गुड फ्राइडे की तैयारी प्रार्थना और उपवास के रूप में चालीस दिन पहले ही प्रारम्भ हो जाती है। इस दौरान शाकाहारी और सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता है। गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अन्तिम सात वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केन्द्रित हैं। इस वर्ष गुड फ्राइडे 10 अप्रैल शुक्रवार को मनाया जाएगा।

गुड फ्राइडे
कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे

यह त्यौहार ईसाई धर्म के लोगों द्वारा कैलवरी में ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया है। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जो ईस्टर सन्डे से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को आता है और इसका पालन पाश्कल ट्रीडम के अंश के तौर पर किया जाता है। यह अक्सर यहूदियों के पासोवर के साथ पड़ता है। गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। ईसा मसीह के जन्म क्रिसमस का आनंद मनाने के कुछ ही दिन बाद ईसाई तपस्या, प्रायश्चित्त और उपवास का समय मनाते हैं। यह समय जो 'ऐश वेडनस्डे' से शुरू होकर 'गुड फ्राइडे' को खत्म होता है, 'लेंट' कहलाता है। जिस सलीब क्रॉस पर ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था उसके प्रतीक रूप में आस्थावानों की श्रद्धा स्वरूप लकड़ी का एक तख्ता गिरजाघरों में रखा जाता है। ईसा के अनुयायी एक-एक कर आकर उसे चूमते हैं। तत्पश्चात समारोह में प्रवचन, ध्यान और प्रार्थनाएँ की जाती हैं। इस दौरान श्रद्धालु प्रभु यीशु द्वारा तीन घंटे तक क्रॉस पर भोगी गई पीड़ा को याद करते हैं। रात के समय कहीं-कहीं काले वस्त्र पहनकर श्रद्धालु यीशु की छवि लेकर मातम मनाते हुए एक चल समारोह निकालते हैं और प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया जाता है। चूँकि गुड फ्राइडे प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन है अतः इस दिन गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जातीं। बाइबिल में उल्लेख है कि एक विद्वान ने ईसा से पूछा, गुरुवर, अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए मुझे क्या करना होगा? ईसा ने उससे कहा, ईश्वर को अपने हृदय, आत्मा और सारी शक्ति से प्यार करो और अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो। तब उस व्यक्ति ने एक और प्रश्न किया, लेकिन मेरा पड़ोसी कौन है? ईसा ने कहा, किसी भी समय वह जरूरतमंद और लाचार व्यक्ति जो तुम्हारे सामने है, वही तुम्हारा पड़ोसी है। ,रोमन कैथोलिक चर्च गुड फ्राइडे को उपवास दिवस के तौर पर मानता है, जबकि चर्च के लैटिन संस्कारों के अनुसार एक बार पूरा भोजन हालांकि वह नियमित भोजन से कम होता है और अक्सर उसमें मांस के बदले मछली खायी जाती है और दो कलेवा यानी अल्पाहार लिया जाता है। रोमन रीति के अनुसार सामान्यतः पवित्र बृहस्पतिवार की शाम को प्रभु के भोज के उपरांत कोई मास उत्सव नहीं होता जब तक कि ईस्टर निगरानी की अवधि बीत न जाये। प्रभु ईसा मसीह के स्मरण में भोज का कोई उत्सव नहीं होता और वह केवल पस्सिओं ऑफ़ द लोर्ड के सर्विस के दौरान भक्तों में वितरित किया जाता है। पूजा वेदी पूरी तरह से खाली रहती है और क्रॉस, मोमबत्ती अथवा वस्त्र कुछ भी वहां नहीं रहता। प्रथा के अनुसार ईस्टर निगरानी अवधि में जल का आशीर्वाद पाने के लिए पवित्र जल संस्कार के पात्र खाली किये जाते हैं। ईस्टर निगरानी की अवधि के दौरान गुड फ्राइडे अथवा पवित्र शनिवार को घंटियाँ नहीं बजाने की परम्परा है। पैशन ऑफ़ द लॉर्ड के उत्सव का आदर्श समय अपराह्न तीन बजे पादरी के पहनावे का रंग लाल होता है। उन्नीस सौ सत्तर से पहले पहनावे का रंग काला होता था, केवल कम्यूनियन वाला हिस्सा बैगनी रंग का होता था। उन्नीस सौ पचपन से पहले पूरा पहनावा ही काला होने का विधान था। अगर कोई बिशप यह अनुष्ठान संपन्न करता है, वह एक सादा मुकुट पहनता है। प्रार्थना के तीन भाग होते हैं- बाइबल और धर्म ग्रंथों का पाठ, क्रॉस की पूजा और प्रभु भोज में सहभागिता। बाइबल पाठ के पहले भाग में प्रभु यीशू के प्रति प्रेम और गुणगान की आवृत्ति या गायन होता है जो अक्सर एक से अधिक पाठकों या गायकों द्वारा किया जाता है। इस प्रथम चरण में प्रार्थना की एक श्रृंखला होती है जो चर्च, पोप, पादरी और चर्च में आने वाले गृहस्थों, प्रभु यीशु मसीह में विश्वास नहीं करने वालों, भगवान पर विश्वास नहीं करने वालों, सार्वजनिक कार्यालयों में काम करने वालों और विशेष तौर पर जरूरतमंद लोगों के लिए की जाती है। गुड फ्राइडे के त्यौहार के दूसरे चरण में क्रॉस की पूजा की जाती है। एक क्रूसीफिक्स जिसमें एक खास पारम्परिक ढंग से यीशु के लिए गीत गाये जाते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है फिर भी यह धार्मिक समागम आम तौर पर वेदी के पास होता है, जिसमें सत्य और निष्ठा के साथ सम्मान व्यक्त किया जाता है और खास तौर पर व्यक्तिगत रूप से जब प्रभु यीशू के प्रति प्रेम भाव के गीत गाये जा रहे हों। इसका तीसरा भाग होता है पवित्र प्रभु भोज का, जो इस त्यौहार की अंतिम कड़ी है। यह शुरू होती है आवर फादर के साथ लेकिन "रोटी तोड़ने की रस्म" और इससे संबंधित मंत्र का उच्चारण नहीं किया जाता। पवित्र गुरुवार की प्रार्थना सभा में अभिमंत्रित प्रभु प्रसाद को भक्तों में वितरित किया जाता है।

गुड फ्राइडे को लेकर धारणा

ऐसा माना जाता है कि गुड फ्राइडे पर, यीशु को पादरियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इसलिए, गुड फ्राइडे वह समय माना जाता है जब ईसाई उपवास रखते हैं और मसीह के जन्म के दिन मनाते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि अच्छे शुक्रवार में 'अच्छा' को 'भगवान' के रूप में जाना जाता है और यह भी एक आम धारणा है कि 'अच्छा' शहीद द्वारा लाए गए उपहार को संदर्भित किया जाता है। और विचारों में से एक के अनुसार, इस दिन, यह यीशु है जो स्वर्ग में चला गया। यह जीवन और आत्मा के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि "अच्छा" शब्द "भगवान" या भगवान के शुक्रवार से विकसित हुआ। गुड फ्राइडे पर सेरेमोनियल पूजा ग्रंथों में वर्णित घटनाओं से निकटता से संबंधित है। शुक्रवार को कुछ मंडलियों में तीन घंटे की सेवा होती है, जो तीन घंटों का प्रतिनिधित्व करती है जब यीशु मसीह को क्रूस पर फांसी दी गई थी। एक सामान्य सेवा में क्रूस पर रहते हुए मसीह के सात उच्चारणों का प्रतिनिधित्व करने वाले सात विशिष्ट तत्व शामिल हैं।

क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे 

लगभग 2 हजार साल पहले ईसा मसीह ने लोगों को सही राह दिखाने की पहल की थी। लोगों का हाथ पकड़ उन्हें अंधेरे से रोशिनी में लेकर आए। यह सब देख यहूदियों के कट्टरपंथी धर्मगुरुओं को सहन नहीं हुआ और उन्होंने इसका विरोध किया। उन्हें ईसा मसीह में कोई मसीहा वाली बात नहीं नजर आती थी। यहूदियों के कट्टरपंथी धर्मगुरुओं को ईसा मसीह द्वारा का खुद को ईश्वर पुत्र बताना भारी पाप लगता था। सोमनों को हमेशा यहूदी क्रांति का डर सताता रहता था। इस कारण कट्टरपंथी धर्मगुरुओं ने इस बात की शिकायत रोमन गवर्नर पिलातुस को कर दी। इसके बाद कट्टरपंथी धर्मगुरुओं को खुश करने के लिए पिलातुस ने ईसा को क्रूस पर लटकाने की सजा सुनाई। ईसा मसीह के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी गईं। जीसस को निर्दोष होने के बावजूद सूली पर लटकाया गया था। बावजूद इसके यीशु ने किसी बात का उलाहना नहीं दिया। न ही किसी बात की शिकायत की। बस इतना ही कहा, ‘हे ईश्वर इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। ’ ये कहकर ईसा ने प्राण त्याग दिए।

इस दिन को ‘गुड’ क्यों कहते हैं

लेकिन आज भी लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि जब इस दिन (फ्राइडे) ईसा मसीह ने अपने प्राण त्यागे थे। तब इस दिन को ‘गुड’ क्यों कहा जाता है। गुड का मतलब तो अंग्रेजी में अच्छा कहा जाता है। गुड इसलिए कहा जाता है क्योंकि क्रिश्चन समुदाय का मानना है कि भगवान यीशु मसीह ने अपनी जान लोगों की भलाई के लिए दे दी थी। इसलिए इस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है। मौत के तीन दिन के बाद ईसा जीवित हो गए थे। लोगों में इस बात की खुशी थी। उनके दोबारा जीवित होने की इस घटना को ईसाई धर्म के लोग ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार मानते हैं। इस साई धर्मानुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे। ईसा मसीह को यीशु के नाम से भी पुकारा जाता है। यीशु का जीवन, भाईचारे, सहनशीलता और अमन की मिसाल है। उनके संदेश आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनका जीवन, बल्कि सूली पर किया गया बलिदान भी मानवता को सदैव राह दिखाता रहेगा। ईसा मसीह के बलिदान दिवस को गुड फ्राइडे कहते हैं। इस दिन श्रद्धालु प्रेम, सत्य और विश्वास की डगर पर चलने का प्रण लेते हैं। कई जगह लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर शोक व्यक्त करते हैं एक लोकप्रिय समारोह गुड फ्राइडे पर होता है जिसे लोकप्रिय रूप से 'द वे ऑफ द क्रॉस' के नाम से जाना जाता है। इस अनुष्ठान को भीड़ के साथ पादरी द्वारा किया जाता है और एक बड़े लकड़ी के क्रॉस को उस क्रॉस का प्रतिनिधित्व करता है जिस पर यीशु को फांसी दी गई थी और उसे मार डाला गया था।

मसीह का क्रूस पर चढ़ना

यीशु को भगवान का पुत्र माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनके जन्म के समय उनके चेहरे पर कुछ अलग प्रकार की चमक थी। उन्होंने समाज को प्रेम और जागरुक करने का पाठ पढ़ाया लेकिन रोमन और यहूदी समुदाय समेत कई पुजारियों ने उन्हें गलत समझा उन्हें लगा कि यह भ्रम फैला रही है। उन्होंने उनके खिलाफ षड्यंत्र किया जिसमें उन्होंने मसीह को पकड़ने की योजना बनाई। उनके खिलाफ षड्यंत्र करने के बाद, उन्होंने लोगों के खिलाफ आरोप लगाया कि वे अपने राजा को करों का भुगतान न करें और राज्यपाल के सामने इन आरोपों का दावा करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। यीशु को उन्हें रोमन गवर्नर के सामने पेश किया गया उसकी निर्दोषता साबित करें। लेकिन जैसे भाग्य उनके पक्ष में था, रोमन गवर्नर को उनकी शिक्षाओं में कुछ भी गलत नहीं मिला और उसे क्लीन चिट दे दी। लेकिन कुछ समुदीयों ने कड़ी मशक्कत करके उन पर झूठे आरोपों को सिद्ध कर दियाय़ आखिरकार, मसीह को यहूदी और यहूदा समुदायों को सौंप दिया गया क्योंकि उन्होंने रोमन राज्यपाल द्वारा दिए गए किसी भी फैसले का पालन नहीं किया था। मसीह के कब्जे के बाद वे उसे क्रूस पर चढ़ाने के लिए ले गए। उन्हें अपने विरोधियों द्वारा क्रूरता से मार डाला गया। उन्हें कांटों का मुकुट पहनाया गया। लकड़ी की सूली पर उन्हें कील मार-मार कर ठोका गया। इसलिए, आज तक गुड फ्राइडे पर दुनिया भर के चर्चों में एक क्रॉस का अनावरण किया जाता है।

गुड फ्राइडे का संदेश

गुड फ्राइडे का संदेश यह है कि बुराई कभी अच्छाई से जीत नहीं सकती। केवल भलाई से, अहिंसा द्वारा हिंसा और दुश्मनों की नफरत पर जीत हासिल की जा सकती है। 
अपने दुश्मनों से प्यार करो।
दूसरों के साथ अन्याय मत करो।
भगवान पर भरोसा रखो।
कल के बारे में चिंता मत करो।

गुड फ्राइडे
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