भारत का दक्षिणी राज्य कर्नाटक अपने मेलों और त्यौहारों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। कर्नाटक मे आए दिन कोई ना कई त्यौहार या मेले का आयोजदन किया जाता है। यही कारण है कि कर्नाटक को उत्सव और त्यौहारों की भूमि भी कहा जाता हैं। यहा पूरे साल कई कला और संस्कृति त्यौहार आयोजित किए जाते हैं। यह कर्नाटक के त्योहार यहा की परंपरा की एक झलक प्रस्तुत करते है। मैसूर दशहरा से लेकर कुनुनुरा में मकर संक्रांति तक, राज्य की हर जगह का अपना त्यौहार है। इसके साथ ही कर्नाटक एक बहुसांस्कृतिक समाज होने के नाते, यहा के लोग विभिन्न प्रकार के त्योहारों, समारोहों और मेलों का जश्न मनाते है। कर्नाटक के त्यौहार और मेले रोचक , मनोरंजक और बहुत सारे नृत्यो से भरपूर होते है। कर्नाटक के इन्हीं मेलों और उत्सवों में से एक हम्पी मेला है। हम्पी महोत्सव कर्नाटक सरकार द्वारा इस शानदार भूमि पर दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करने के लिए आयोजित किया जाता है। हम्पी उत्सव समारोह में नृत्य, नाटक, संगीत, आतिशबाज़ी इत्यादि का आयोजन किया जाता है। कर्नाटक के क्षेत्र हम्पी का इतिहास काफी पुराना है। हम्पीनाम असल में कन्नड़ शब्द हम्पे से पड़ा है और हम्पे शब्द तुंगभद्रा नदी के प्राचीन नाम पम्पा से आया था। हम्पी का इतिहास तो वैसे काफी प्राचीन है, लेकिन यहां विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में दो भाइयों हरिहर राय और बुक्का राय ने की थी। हम्पी उत्सव को विजय उत्सव भी कहते हैं। अक्तूीबर और नवंबर माह के दौरान आयोजित हम्पी उत्सयव भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। नृत्य , नाटक और संगीत के शानदार प्रदर्शनों से विशिष्टख यह उत्संव सैंकड़ों वर्ष पुराने पहाड़ों और खंडहरों के बीच आयोजित किया जाता है। जब हम्पी‍ उत्स व का आयोजन किया जाता है तब विजयनगर के निकट स्थित हम्पीी ग्राम चित्राकर्षक संगीत, नृत्यि और नाटक के आनंद से भर जाता है। कर्नाटक सरकार प्रत्येरक वर्ष इस उत्सीव का आयोजन करती है। कठपुतली नृत्यन, आतिशबाजी और भव्यर प्रदर्शन इस उत्स्व की कुछ विशिष्टरताएं हैं। इस उत्सव के दौरान कई प्रसिद्ध कलाकार दूर-दूर से इसमें शामिल होने के लिए आते हैं। यह सब विजयनगर काल की भव्यता को फिर से जीवंत करता है। हम्पी के पूरे मार्गों में, सजाए गए हाथी, ,सजे हुए घोड़े सजाए जाते हैं। पांच अलग-अलग स्थानों पर कई गायक, पारंपरिक नृत्य करके कलाकार मेहमानों और पर्यटकों का मनोरंजन करते हैं।

हम्पी महोत्सव
कैसे मनाते हैं हम्पी उत्सव

हम्पी उत्सव या विजय उत्सव कर्नाटक का बहुत ही अनोखा उत्सव है। यह एक पांरपरिक उत्सव है जिसे विजयनगर राज के समय मनाया जाता था। इस उत्सव को बहुत ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है और सारा माहौल बहुत ही रंगीन और खुशनुमा हो जाता है। हम्पी उत्सव जनवरी के महीने के दौरान मनाया जाता है। हम्पी उत्सव का आयोजन हम्पी नामक शहर में किया जाता है। जो पहले विजयनगर सम्राजय की राजधानी हुआ करता था। यह त्यौहार विजयनगर सम्राज्य के शासन काल के समय से मनाया जाता है। जो उस समय विजयनगर सम्राज्य के विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता था। आज भी यहा के लोग इस परंपरा और सांस्कृति को संजोये रखने के लिए इस उत्सव का आयोजन बडे पैमाने पर करते है। जिसको मनाने के लिए भारी संख्या में यहा लोग एकत्र होते है। यह त्यौहार संगठित और कर्नाटक पर्यटन द्वारा उत्साह और उमंग के साथ आयोजित किया जाता है। त्यौहार का मुख्य आकर्षण कन्नडिगास नृत्य, नाटक, आतिशबाजी, कठपुतली शो, शानदार परेड, और ड्रम और पाइप जैसे संगीत वाद्ययंत्र हैं। वैसे ही यह औपनिवेशिक युग में भी होता था। नृत्य, संगीत, नाटक और प्रक्रियाओं के माध्यम से, आयोजकों ने पिछले युग के आकर्षण को वापस लाने की कोशिश की। हम्पी त्योहार तीन दिनों के लिए मनाया जाता है। शुरुआती दो दिनों में, नृत्य और संगीत कार्यक्रम होते हैं। त्यौहार का तीसरा दिन एक शानदार जंबो सावरी या हाथी मार्च को समर्पित है। तीसरे दिन के दौरान, कोई हाथी को हम्पी की मुख्य सड़कों से गुजरते है। डिज़ाइन किए गए कठपुतली शो और आतिशबाजी प्रदर्शन अन्य चीजें हैं जो त्योहार के लिए एक साथ रखी जाती हैं। हम्पी-त्योहार दुनिया के हर कोने से प्रसिद्ध हस्तियां और कलाकार को उनकी प्रतिभा के साथ त्योहार की शोभा बढाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। सजाए गए हाथियों, सजावटी वास्तुकला और शास्त्रीय नृत्य और संगीत जैसी चीजों के साथ, त्यौहार औपनिवेशिक युग के लोगों की भव्य जीवनशैली के बारे में याद दिलाता है। विजयनगर कारीगरों के वंशजों द्वारा हस्तनिर्मित ड्रम और पाइपों की आवाज़ के साथ हवा व्यापक रूप से फैली हुई है। लोग हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं से भी खरीद सकते हैं। पर्यटक कुछ पंपिंग गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। त्यौहार में और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रमुख आकर्षणों में से एक खरीदारी के लिए वस्तुओं का आयोजन किया जाता है। हम्पी शिल्प और शिल्प कौशल की कुछ उत्कृष्ट विस्तृत किस्में प्रस्तुत करता है। इस उत्सव में तरह-तरह की चिज़ें होती हैं जैसे नृत्य, संगीत, नाटक इत्यादि हम्पी उत्सव लगभग तीन दिनों तक मनाया जाता है। जिन लोगों के लिए नृत्य, संगीत, नाटक में रुचि है, वह दुनिया के कोने-कोने से इस उत्सव को देखने आते हैं। कर्नाटक के अलावा भी बहुत सारे जगह से लोग आते हैं इस उत्सव में प्रर्दशन करने इसमें शामिल होने के लिए। कल्चर प्रोग्राम के अलावा भी बहुत सारी चीज़े होती हैं जैसे वाटर स्पोर्ट, काइट उत्सव, फूड कोर्ट और पेटिंग कॅाम्पटिशन। इस उत्सव के दौरान पूरे शहर को साफ किया जाता है, बाथरुम की सुविधा की जाती है और पीने के पानी की सुविधा भी कि जाती है।

हम्पी का इतिहास

हम्पी नगर, विजयनगर साम्राज्य की लुप्त सभ्यता का अनोखा प्रमाण है जो कृष्ण देव राय (1509-30) के शासनकाल में अपने चरमोत्कैर्ष पर पहुंचा था। यह एक प्रकार की संरचना का उत्कृनष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है जो दक्षिण भारत के साम्राज्यों को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दृश्य को दर्शाता है जिनको मुसलमानों से खतरा था और जो समय-समय पर गोवा के पुर्तगालियों के सहयोगी भी थे। हम्पी का आडंबरहीन भव्य स्थल अंतिम महान हिन्दू साम्राज्यि विजयनगर की अंतिम राजधानी थी। इसके बेहद अमीर राजकुमार ने द्रविड मंदिर और महलों का निर्माण कराया था जिसे 14वीं एवं 16वीं शतब्दियों के बीच आने वाले यात्रियों से बड़ी प्रशंसा प्राप्तर हुई। वर्ष 1565 में दक्कन मुस्लिम महासंघ द्वारा विजय प्राप्त करने पर इस नगर को छोड़ने के पहले, छ: महीनों की अवधि में इसे लूट लिया गया था। दक्षिण भारत का अंतिम महान साम्राज्य विजय नगर की अंतिम राजधानी के रूप में हम्पी्, कपास और मसाला व्यापार से समृद्ध मध्ययुगीन दुनिया के सबसे सुन्दर नगरों में से एक था। इसके महलों और द्रविड़ मंदिरों की अरब (अब्दुल राजाक), पुर्तगाली (डोमिंगो पेस) या इतालवी (निकोलो डे कोंटी) यात्रियों द्वारा प्रशंसा की गई थी। 1565 में तालिकोटा युद्ध के बाद मुसलमानों द्वारा विजय प्राप्त करने पर छ: महीने तक इसे लूटा गया था और बाद में इसे छोड़ दिया गया। शानदार स्मारकीय अवशेषों, आंशिक रूप से रिक्त और पुन: प्राप्त हम्पी का निर्माण कार्य, आज विश्व के बहुत अनूठे खंडहरों में से एक है।

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