विकलांगता किसी व्यक्ति के शरीर में होने वाली शारीरिक और मानसिक कमी होती है, जो कभी प्राकृतिक भी हो सकती है और कभी परिस्थितिजन्य भी, जिससे वह अन्य लोगों पर आश्रित रहने को बाध्या होते है | सोचने वाली एक बात यह है कि, हम आज इतने आधुनिक हो चुके है | एक वैज्ञानिक युग मे रहने लगे है | विज्ञान और वैज्ञानिक आए दिन कोई ना कोई नया अविष्कार करते रहते है, फिर चाहें वह मनुष्य को पुनः अमरता दिलाने की खोज हो या इंसानी शरीर के क्लोन बनने की बात हो, हम सब जगह आगे है | लेकिन क्यों हम ऐसे इंसानों को पूर्णतः ठीक नही करपाते जो मुक़बाधिर, नेत्रहीन, अपंग, पोलियोंग्रस्त या ऐसी किसी भी अक्षमता के शिकार है | अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस इन्हीं सभी मुद्दों को ध्यान में रखकर पूरे विश्व द्वारा किया गया एक सराहनीय प्रयास है, जिसकी सहायता से यह कोशिश की जाती है कि, ऐसे विकलांग व्यक्तियों के प्रति लोगों का रवैईया सकारात्मक बने |

अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस की शुरुआत, शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के साथ समाज में होने वाले भेद-भाव को समाप्त करने के उद्देश्य से हुई थी | संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा ने 1981 को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में घोषणा की थी, जो आगे जाकर 1991-92 में 3 दिसम्बर से अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के तौर पर विश्व के साथ-साथ भारत जैसे कई देशों में मनाया जाने लगा | भारत देश में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन इस समस्या से जुड़े सभी कार्य यहीं से संचालित होते है | उचित प्रयास और सही मार्गदर्शन की वजह से ही संयुक्तराष्ट्र संघ द्वारा "3 दिसम्बर1992" से हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है | 1992 से ही पूरी दुनिया में इस दिन एक थीम लेकर काम किया जाता हैं|

इस वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाए जाने की थीम "भविष्य के लिए निर्धारित किए गये सभी सत्रह लक्ष्यों की प्राप्ति" है |

अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस

पूर्व वर्षों की कुछ थीम्स:-

-वर्ष 2000 का थीम था “सभी के लिये सूचना क्रांति कार्य निर्माण”।
-वर्ष 2001 का थीम था “पूर्ण सहभागिता और समानता: प्रगति आँकना और प्रतिफल निकालने के लिये नये पहुंच मार्ग के लिये आह्वान”।
-वर्ष 2002 का थीम था “स्वतंत्र रहन-सहन और दीर्घकालिक आजीविका”।
-वर्ष 2003 का थीम था “हमारी खुद की एक आवाज”।
-वर्ष 2004 का थीम था “हमारे बारे में कुछ नहीं, बिना हमारे”।
-वर्ष 2005 का थीम था “विकलांगजनों का अधिकार: विकास में क्रिया”।
-वर्ष 2006 का थीम था “ई- एक्सेसिबिलीटी”।
-वर्ष 2007 का थीम था “विकलांगजनों के लिये सम्माननीय कार्य”।
-वर्ष 2008 का थीम था “विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर सम्मेलन: हम सभी के लिये गरिमा और न्याय”।
-वर्ष 2009 का थीम था “एमडीजी का संयुक्त निर्माण: पूरी दुनिया में विकलांग व्यक्तियों और उनके समुदायों का सशक्तिकरण”।
-वर्ष 2010 का थीम था “वादे को बनाये रखना: 2015 और उसके बाद की ओर शताब्दी विकास लक्ष्य में मुख्यधारा विकलांगता"।
-वर्ष 2011 का थीम था “सभी के लिये एक बेहतर विश्व के लिये एक साथ: विकास में विकलांग व्यक्तियों को शामिल करते हुए”।
-वर्ष 2012 का थीम था “सभी के लिये एक समावेशी और सुगम्य समाज उत्पन्न करने के लिये बाधाओं को हटाना”।
-वर्ष 2013 का थीम था “बाधाओं को तोड़ें, दरवाज़ों को खोलें: सभी के लिये एक समावेशी समाज और विकास”।
-वर्ष 2014 का थीम था “सतत् विकास: तकनीक का वायदा”।
-वर्ष 2015 का थीम था “समावेश मायने रखता है: सभी क्षमता के लोगों के लिये पहुंच और सशक्तिकरण”।

अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस का उद्देश्य

हमारे परिवेश में,आस-पड़ोस, गली मोहल्लों में ऐसे कितने लोग है, जिनके विकलांग होने की जानकारी हमें नही है| एक आकड़ें के अनुसार पूरे विश्व में अल्पसंख्यक तबके की बात करें तो विकलांगों का प्रतिशत 14-15% लेकर सबसे निचलें स्थान पर है | संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा विकलांग दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक हर क्षेत्र में उनके अधिकारों का शोषण कोई अन्य व्यक्ति ना कर सकें | समाज में उनके साथ भी वैसा व्यवहार किया जायें, जो किसी अन्य व्यक्ति के साथ किया जाता है| उन्हें भी समानता का पूर्ण अधिकार मिलें, ताकि उनके दिल में कभी कोई हीनभावना घर ना करें |

संयुक्त राष्ट्रसंघ और विश्व में विकलांगों के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं द्वारा इस दिन, विश्व के कई जगहों में विकलांगों द्वारा बनाई गयी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाती है | जिससे उन्हें मानसिक प्रोत्साहन तो मिलता ही है, साथ प्रदर्शनी देखने आए लोग इन कृतियों की ख़रीदी भी करते है, जिससे उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन भी प्राप्त होता है | इस तरह उनके लिए कई जगह स्वास्थ्य शिविर लगाकर उनकी स्थिति की चिकित्सकिय जाँच भी की जाती है | उन्हें उत्साहित करने हेतु कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे जाते है, जिसमे उनके द्वारा कई तरह की प्रस्तुतियां दी जाती है| इन सभी तरह के क्रियाकलापों का सिर्फ़ यही उद्देश्य होता है, कि उन्हें भी समाज में एक ऐसी कड़ी समझी जाए जो, इस समाज के लिए ज़रूरी है |

भारत और विकलांग दिवस

भारत में भी विकलांग दिवस के दिन कई स्थानों पर शिविर और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है| भारत में सरकार की ओर से "सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय" नाम के एक मंत्रालय का गठन ही, इसी उद्देश्य से किया गया है कि, किसी दुर्घटना या जन्म से मिली विकलांगता से ग्रसित लोगों के हित और प्रगति के लिए कार्य निर्बाध रूप से निरंतर चलता रहे|

इस दुनिया में ऐसे कई विद्वान हुए जिन्होनें बहुत सुलझी हुई बातें कहीं है| श्रीराम आचर्या ने कहां है कि यदि किसी को कुछ देना चाहते हो, तो उसके भीतर आत्मविश्वास जगाने वाला प्रोत्साहन दो| इसी उत्साह, इसी प्रोत्साहन की ज़रूरत इन लोगों को सबसे अधिक है | विकलांगता शारीरिक और मानसिक होने से ज़्यादा हमारी सोच में है, जो हम इन्हें हीन और अपने से कमतर आँकतें है| ज़रूरत है तो ऐसी सोच बदलने की |

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