महिला दिवस अर्थात महिला को सम्मान देने वाला एक दिन। दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी तरह महिला से जुड़ा होता है। मां, बहन, पत्नी, दोस्त, दादी, इत्यादि कई ऐसे रिश्ते हैं जो एक व्यक्ति को सफल बनाते हैं किन्तु उसी महिला को एक समय तक सम्मान कि दृष्टि से नहीं देखा जाता था। एक महिला प्रतिदिन अपने पिता, पुत्र, पति, भाई इत्यादि के लिए त्तपर रहती है, उन्हीं के लिए कार्य करती है। फिर भी महिलाओं को ना पुरषों के बराबर समझा जाता था, ना उन्हें कोई अधिकार दिए जाते थे। महिलाओं को सदैव हीन नजरों से देखा जाता था किन्तु आज महिलाओं के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए एक महिला को सम्मान देना आवश्यक है। महिलाओं के इन्हीं गुणों और उन्हें पुरुषों के बराबर एक समान अधिकार दिलाने हेतु प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिवस महिलाओं के सम्मान में एक जश्न होता है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। वो अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करती है और अपने अधिकारों को भी समझती है। महिलाओं के इन्हीं गुणों के कारण उनके सम्मान का प्रतिक है अंतराष्ट्रीय महिला दिवस। इस वर्ष अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च शुक्रवार को मनाया जाएगा।

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस


क्यों मनाया जाता है महिला दिवस

महिलाओं को प्राचीन काल से ही पुरुषों से कम आंका जाता रहा है। दरअसल इतिहास के अनुसार समानाधिकार की यह लड़ाई आम महिलाओं द्वारा शुरू की गई थी। प्राचीन ग्रीस में लीसिसट्रा नाम की एक महिला ने फ्रेंच क्रांति के दौरान युद्ध समाप्ति की मांग रखते हुए इस आंदोलन की शुरूआत की थी। फारसी महिलाओं के एक समूह ने वरसेल्स में इस दिन एक मोर्चा निकाला, इस मोर्चे का उद्देश्य युद्ध की वजह से महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचार को रोकना था। 28 फरवरी सन् 1909 को पहली बार अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसमें सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई। दरअसल उन दिनों न्यूयॉर्क में कपड़ा मिलों में काम करने वाली महिलाएं शोषण के चलते बेहद परेशान थीं। बीते एक साल से उनकी हड़ताल चल रही थी और उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। उन्होंने विपरित परिस्थितियों में काम किया, पुरुषों के मजदूरी का आधा कमाया, खराब स्वास्थ्य से समय से उनकी मृत्यु हो गई और उन्हें वोट देने का अधिकार तक नहीं दिया जाता था। तब इनके इस संघर्ष को समर्थन देते हुए 28 फरवरी 1909 को सोशलिस्ट पार्टी ने इन्हें सम्मानित किया। अपने दम पर महिला कपड़ा कर्मचारियों ने तब काम के घंटे और बेहतर वेतनमान की अपनी लड़ाई लड़ी और उसमें जीत हासिल की। सन 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल द्वारा कोपनहेगन में महिला दिवस की स्थापना हुई और 1911 में ऑस्ट्रि‍या, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में लाखों महिलाओं द्वारा रैली निकाली गई। महिलाओं के लेकर प्रस्ताव 17 देशों के 100 से अधिक महिलाओं के सम्मेलन द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। मताधिकार, सरकारी कार्यकारिणी में जगह, नौकरी में भेदभाव को खत्म करने जैसी कई मुद्दों की मांग को लेकर इस का आयोजन किया गया था। 1913-14 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूसी महिलाओं द्वारा पहली बार शांति की स्थापना के लिए फरवरी माह के अंतिम रविवार को महिला दिवस मनाया गया। यूरोप भर में भी युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन हुए। 1917 तक विश्व युद्ध में रूस के 2 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए, रूसी महिलाओं ने फिर रोटी और शांति के लिए इस दिन हड़ताल की। हालांकि राजनेता इस आंदोलन के खिलाफ थे, फिर भी महिलाओं ने एक नहीं सुनी और अपना आंदोलन जारी रखा और इसके फलस्वरूप रूस के जार को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी साथ ही सरकार को महिलाओं को वोट देने के अधिकार की घोषणा भी करनी पड़ी। महिला दिवस अब लगभग सभी विकसित, विकासशील देशों में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनकी क्षमता, सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक तरक्की दिलाने व उन महिलाओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को तब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली जब सन् 1975 में पहली बार यूनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च के ये दिन मनाया गया। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए सन् 2011 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मार्च महीने को 'महिलाओं का महीना' के तौर पर मान्यता दी। इसके बाद अमेरिका में मार्च के पूरे महीने महिलाओं की मेहनत और उपलब्धियों को लेकर उन्हें सम्मानित करने की रवायत शुरू हुई। महिलाओं के इतने लबें संघर्ष का परिणाम ही है अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

महिला दिवस का जश्न

शुरुआती सालों से, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को विकसित और विकासशील देशों में महिलाओं के लिए एक नया वैश्विक आयाम माना है। बढ़ता अंतरराष्ट्रीय महिला आंदोलन, जिसे चार वैश्विक संयुक्त राष्ट्र महिला सम्मेलनों द्वारा मजबूत किया गया है, इसने राजनीतिक और आर्थिक प्रक्रिया में महिलाओं के अधिकारों और भागीदारी की मांग करने के लिए समेकित प्रयासों के लिए एक रैलींग प्वाइंट बनाने में मदद की है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक प्रगति पर प्रतिबिंबित करने, परिवर्तन के लिए कॉल करने और महिलाओं के अधिकारों के इतिहास में असाधारण भूमिका निभाते हुए सामान्य महिलाओं द्वारा साहस और दृढ़ संकल्प के कार्यों का जश्न मनाने का समय है। भारत के साथ-साथ अन्य देशों में महिला दिवस को लेकर सरकारी और गैरसरकारी स्तर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है। जिसमें पुरुषों की अहम भागीदारी होती है। कहने को तो भारत में पुरुष प्रधान समाज है, इस मिथक को महिलाएं अब तोड़ने लगी हैं। जिसमें पुरुषों का भी पूरा समर्थन भी इन्हें मिल रहा है। महिला दिवस कार्यक्रमों में पुरुषों की ओर से खूब हौसलाफजाई की जाती है। महिलाओं के लिए इस दिन कई रैलियां, बाईक रैली, सम्मानित कार्यक्रम, संगोष्ठियां, महिला कलाकारों की प्रदर्शिनियां इत्यादि के जरिए महिला दिवस मनाया जाता है। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन महिलाओं के लिए कई स्लोगन, कविताएं, नाटकों, रंगमंचों का आयोजन भी किया जाता है। घर-बाहर हर जगह महिला प्रेरित कार्यक्रम होते हैं। चीन, रुस जैसे अन्य कई देशों में महिला दिवस के दिन महिलाओं के लिए अवकाश घोषित होता है। इस दिन महिलाओं की समानता, स्वतंत्रता, अधिकार इत्यादि की बात की जाती है। अत: अतंराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं को एक समान होने का एहसास दिलाता है, उन्हें उनके अधिकारों से रुबरु कराता है।

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