जय प्रकाश नारायण जिनको जेपी के नाम से भी जाना जाता है वो भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और जनता के नेता थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इंदिरा गांधी के खिलाफ विपक्ष को इकट्ठा कर उन्हें सत्ता से बाहर करने को लेकर उन्हे आज भी याद किया जाता है। समाजसेवा के लिए उन्हें मैगससे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। पटना के हवाई अड्डे का उनके सम्मान में रखा गया है वहीं दिल्ली का सबसे बड़ा अस्पताल लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल भी उनके नाम पर है।
 

जीवन

जय प्रकाश जी का जन्म 11 अक्टूबर 1902 कोे बिहार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद ये पढ़ाई के लिये विदेश गए बाद में मां की तबीयत बिगड़ जाने के कारण देश लौट आए। विद्यार्थी जीवन में ही वो स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए और कई आंदोलनों में भाग लिया। इन्हें जेल भी हुई औऱ नासिक भेजा गया। जेल में इन्हें कुछ और क्रांतिकारी भी मिले और सभी ने मिलकर कांग्रेस सोसलिस्ठ पार्टी की नींव रखी। 1948 में उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया औऱ समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी बनाई।1957 में उन्होंने राजनीति छोड़ने का ठाना।

आपातकाल का वक्त

काफी वक्त तक जेपी राजनीति से दूर रहे। वो इंदिरा गांधी की नीतियों के खिलाफ थे। 1960 के करीब उन्होंने बिहार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। 1974 में विपक्ष को इंदिरा गांधी के सामने मजबूती से खड़ा किया। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने 25 जून 1972 की रात पूरे देश में आपात काल की घोषणा कर दी। इसी तानाशाही के खिलाफ जेपी ने जो आंदोलन छेड़ा व। इस आंदोलन के बाद केंद्र की सत्ता में हालांकि बदलाव आया, परंतु उनकी क्रांति अधूरी रह गई। 15 जून 1974 को गांधी मैदान में जेपी ने सम्पूर्ण क्रांति का उद्घोष किया।

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निधन

जय प्रकाश जी का निधन 8 अक्टूबर 1979 को ह्रदय की बीमारी और शुगर के कारण हुआ। उनके सम्मान में उस वक्त 7 दिन का राजकीय शोक रखा गया था। हर साल उनकी पुण्यतिथि पर उनको याद किया जाता है और उनके विचारों को साझा किया जाता है।
 
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