कालाघोड़ा कला महोत्सवकला (आर्ट) शब्द इतना व्यापक है कि विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ केवल एक विशेष पक्ष को छूकर रह जाती हैं। कला का अर्थ अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है, यद्यपि इसकी हजारों परिभाषाएँ की गयी हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो। यूरोपीय शास्त्रियों ने भी कला में कौशल को महत्त्वपूर्ण माना है। कला की ऐसी प्रदर्शनी भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगती है जो "कालाघोड़ा कला महोत्सव" के नाम से जाना जाता है|

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुम्बई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या 3 करोड़ 29 लाख है, जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है, जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुंबई आर्थिक प्रगति के साथ साथ अपने कला प्रेम के लिए भी प्रसिद्ध है| तभी तो पूरे देश से हर तरह की कला से जुड़े कलाकार इसी शहर में अपनी किस्मत आज़माने आते है| कालाघोड़ा महोत्सव इसी बात का प्रमाण है|

कालाघोड़ा कला महोत्सव की शुरआत

काला घोड़ा कला महोत्सव, मुंबई में आयोजित होने वाला एक वार्षिक कला महोत्सव हैं जिसे कालाघोड़ा संस्था द्वारा 1999 में शुरू किया गया था| इस महोत्सव के विचित्र नाम के पीछे कहानी यह है कि दक्षिणी मुंबई इलाकें में एक स्थान या चौराहा है जहाँ काले घोड़े की मूर्ति लगी है जो अंग्रेज़ो के ज़माने से वहाँ स्थापित की गयी है| काला घोड़ा कला महोत्सव इसी चौराहें के आसपास आयोजित किया है| ये वार्षिक सांस्कृतिक समारोह दक्षिण मुंबई के धरोहर उपक्षेत्र के व्यापक क्षेत्र में आयोजित किया जाने वाला कला का सबसे बड़ा आयोजन होता है।
कालाघोड़ा कला महोत्सव

महोत्सव में कला से जुड़ी हर विधा जैसे डांस, संगीत, चित्रकारी, ग्रॅफिक्स आर्ट, हॅंडीक्राफ्ट, सिनेमा, साहित्य आदि से जुड़ी प्रदर्शनी सजती है| बॉलीवुड के कई कलाकार इस मेले में परफॉर्म करने आते है| बड़ों के अलावा यहाँ बच्चों के लिए उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए कई तरह की ज्ञानवर्धक कार्यशालाएँ लगाई जाती है| पूरे 9 दिन तक चलने वाला यह महोत्सव कला प्रेमियों के आकर्षण का बना रहता है|

कालाघोड़ा कला महोत्सव का वीडियो

 

 

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