लोहड़ी एक ऐसा त्योहार है जिसको मनाने का कोई एक महत्व नहीं बल्कि कई महत्व हैं। सर्दी के जाने की तैयारी, बसंत का आगमन, फसल पकना शुरू होना, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना, दुल्ले भट्टी को याद करना समेत कई कारण हैं लोहड़ी के पीछे।

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माघ की शुरुआत

लोहड़ी के अगले ही दिन माघ का महीना शुरू हो जाता है। 30 दिन का ये महीना जनवरी और फरवरी के बीच में आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से ये 13 जनवरी से 11 फरवरी तक रहता है। इस दिन स्नान का बहुत महत्व है। माना जाता है कि स्नान करने से बुरे कर्म और पाप सब धुल जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि यानि नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन यानि सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इस दिन सूर्य उत्तराणय की तरफ गति शुरू करता है इसलिये इस दिन पूजा पाठ, स्नान और दान का बहुत महत्व है।

लोहड़ी किसानें के लिये महत्व

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गेहूं उगकर तैयार होने की कगार पर होता है। बसंत शुरू हो जाती है। सर्दी भी घटने लगती है और बारिश भी फसलों को ताकत दे रही होती है। अपनी फसल के लिये सब कुछ अच्छा होता देख किसान गदगद होता है और अपने संबंधियों के साथ मिलकर जश्न मनाता है। इस दिन हर घर में मूंगफली, रेवड़ियां, चिवड़े, गजक, भुग्गा, तिलचौली, मक्की के भुने दाने, गुड़, फल इत्यादि खाने और बांटने के लिए रखे जाते हैं। गन्ने के रस की खीर बनाई जाती है और उसे दही के साथ खाया जाता है। ये सारी चीजें इसी मौसम की उपज होती हैं और अपनी तासीर से शरीर को गर्मी पहुंचाती हैं।

लड़कियों को मिलते हैं कपड़े

लोहड़ी के दिन अपनी विवाहित लड़कियों को मां बाप मूंगफली, रेवड़ी, गजक समेत गर्म सूट भी देते हैं। मां बाप अंत तक बच्चियों को ये सूट भेजते हैं। मां बाप के बाद लड़की के भाई और भाभी की जिम्मेदारी होती है कि हर साल सर्दी का एक सूट उन्हें दें।

बच्चों के लिये खास

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जिस तरह दिवाली के लिये बच्चों के दिल में खासी उमंग होती है उसी तरह लोहड़ी के लिये भी बच्चे बहुत उत्साहित होते हैं। छोटी छोटी टोलियां बनाकर बच्चे घर घर जाते हैं और लोहड़ी गाकर सुनाते हैं। लोहड़ी सुनाने के बाद घर वाले बच्चों को रेवड़ी, मूंगफली, मक्की के उबले दाने और पैसे देते हैं। आजकल लोहड़ी के साथ साथ डीजे बजाने का भी प्रचलन चल पड़ा है।

आग जलाकर बजता है ढोल

शाम के वक्त सभी आस पड़ोसी और रिश्तेदार एक जगह इकट्ठे होकर आग जलाते हैं। आग में पहले मूंगफली और रेवड़ियां डाल कर माथा टेका जाता है। फिर खाते पीते हुए ढोल पर भांगड़ा डाला जाता है। महिलाएं गिद्दा डालती हैं। एक दूसरे को बधाइयां दी जाती हैं और सब कुछ भुला कर बस जश्न ही जश्न मनाया जाता है।

लोहड़ी के भांगड़े और बच्चों के लोहड़ी गाने का वीडियो






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