लुंबिनी महोत्सव आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य में आयोजित एक वार्षिक त्योहार है जो आज राज्य में बौद्ध धर्म की विरासत का जश्न मनाने के लिए मंच प्रदान करता है। यह महोत्सव हैदराबाद में नागराजुनगर बांध में आयोजित किया जाता है। लुंबिनी महोत्सव के पीछे बौद्ध धर्म के जनक भगवान गौतम बुद्ध है। उनका जन्मस्थल नेपाल के पास स्थित लुंबिनी गांव में हुआ था जो बौद्ध धर्म के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल है।  उनके जन्मस्थल के नाम से ही इस महोत्सव का नाम लुंबिनी महोत्सव रखा गया है। यह उत्सव आंध्र प्रदेश राज्य में बेहद लोकप्रिय है और तीन दिनों तक रहता है। आंध्र प्रदेश का पर्यटन विभाग इस समय के दौरान इकट्ठे हजारों पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए त्यौहार, उत्सव, घटनाओं, गतिविधियों और अन्य व्यवस्थाओं का आयोजन करता है। भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी में 563 ईसवी में हुआ था। इनके पिता शुद्धोधन शाक्य गण के मुखिया थे। सिद्धार्थ के जन्म के सात दिन बाद ही उनकी मां मायादेवी का देहांत हो गया था। सांसारिक समस्याओं से दुखी होकर सिद्धार्थ ने 29 साल की आयु में घर छोड़ दिया।  बिना अन्न जल ग्रहण किए 6 साल की कठिन तपस्या के बाद 35 साल की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे, पीपल के पेड़ के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने जाने लगे। जिस जगह उन्‍हें ज्ञान प्राप्तह हुआ, उसे बोधगया के नाम से जाना जाता है। उन्ही को समर्पित लुंबिनी महोतस्व पूरे जोश के साथ मनाया जाता है।

 
लुंबिनी फेस्टिवल

महत्व

लुंबिनी का त्यौहार बौद्ध धर्म के महत्व को आंध्र प्रदेश राज्य में एक प्रसिद्ध धर्म के रूप में दर्शाता है। राज्य में बौद्ध धर्म की विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए हर साल आंध्र प्रदेश में लुंबिनी उत्सव मनाया जाता है। गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन हुआ। शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के निकट उत्तरप्रदेश के 'ककराहा' नामक ग्राम से 14 मील और नेपाल-भारत सीमा से कुछ दूर पर नेपाल के अंदर रुमिनोदेई नामक ग्राम ही लुम्बिनी ग्राम है, जो गौतम बुद्ध के जन्म स्थान के रूप में जगतप्रसिद्ध है। कपिलवस्तु में एक स्तूप था, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी थीं। बौद्ध धर्म एक प्रचलित धर्म था जब लुंबिनी महोत्सव आंध्र प्रदेश के 2000 साल पुराने अतीत को पुनर्जीवित करने का एकदम सही अवसर है। यह हर साल बौद्ध धर्म के महत्व का पालन करने और धर्म का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है।

 

उत्सव

लुंबिनी बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत और संस्कृति पर प्रकाश डालने का एक पर्व है जो बौद्ध धर्म की महत्वता को प्रदर्शित करता है। इस तीन दिवसीय लंबे महोत्सव में आम तौर पर विभिन्न रूपों और गतिविधियां आयोजित की जाती है। जो भगवान बुद्ध को समर्पित होती हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को याद करना है। यह त्यौहार महान भव्यता और मस्ती से भरा हुआ होता है। यह त्यौहार स्थानीय चित्रकारों, कारीगरों और मूर्तिकारों के लिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और कुछ राजस्व अर्जित करने के लिए एक बड़ा माध्यम प्रदान करता है। आंध्र प्रदेश राज्य में बौद्ध धर्म की विरासत का सम्मान करने के लिए लुम्बिनी महोत्सव के दौरान दुनिया भर के हजारों भक्त हैदराबाद में इकट्ठे होते हैं। यह उत्सव भगवान गौतम बुद्ध की बताई शिक्षाओं और उनके आदर्शों को याद करने के लिए मनाया जाता है। जो विश्व में बौद्ध धर्म की महत्वता को प्रदर्शित करता है।

 

उत्सव का समय

लुंबिनी त्यौहार आमतौर पर दिसंबर के महीने में दूसरे शुक्रवार को शुरू होता है और तीन दिनों तक चलता है।  2021 में, लुंबिनी महोत्सव दिसंबर माह में आयोजित किया जाएगा। बौद्ध धर्म के महत्व और विरासत का सम्मान करने के लिए हर साल लुंबिनी महोत्सव हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। त्यौहार दिसंबर के महीने में तीन दिनों तक चलने वाले सप्ताहांत में से एक पर मनाया जाता है।

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