भारत वर्षों से ही वीरों की भूमि रही है। ऐसे वीर जिनके सामने अच्छे-अच्छे योद्धा पानी भरते नजर आते हैं। भारतवर्ष में एक से बढ़कर एक वीर और उनकी वीरगाथाएं मौजूद है। इन्हीं वीरों में से एक वीर जिन्होंने इतिहास को बदल कर रखा दिया और पहली स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, वो वीरो के वीर हैं महाराणा प्रताप। महाराणा प्रताप एक सच्चे देश भक्त होने के साथ-साथ एक निडर योद्धा थे। वो योद्धा जिन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर जैसे बड़े बादशाह को धूल चटा दी थी। महाराणा प्रताप का जन्म वैसे तो 9 मई 1540 को राजस्थान के राजस्मंद जिले के कुम्भलगढ़ में हुआ था, किन्तु हिन्दू पंचाग अनुसार उनका जन्म ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तीज को मनाया जाता है। इस बार महाराणा प्रताप की जयंती 6 जून 2019 को मनाई जाएगी। महाराणा प्रताप के पिता उदयपुर के राणा उदय सिंह व माता रानी जयवंता बाई थी। महारणा प्रताप सिसोदिया वंश के राजा थे। उनकी कुल 11 पत्नियां थी।

हल्दीघाटी के युद्ध के लिए लिया जाता है महारणा प्रताप का नाम

महारणा प्रताप एक निडर, बहादूर राजा थे। महारणा प्रताप का नाम हल्दीघाटी के युद्ध के लिए बहुत याद किया जाता है।  जिसमें उन्होंने  अपनी थोड़ी सी सेना के साथ अकबर की विशाल सेना को हरा दिया था। हल्दीघाटी के युद्ध को इतिहास के सबसे बड़े युद्ध के रुप में भी देखा जाता है। मुगलों राजपूतों के बीच हुए घमासान युद्ध में जब सभी राजपूत राजा अकबर से बचने के लिए उनके अधीन हो रहे थे तब महाराणा प्रताप ने अपनी आन की लड़ाई लड़ी और अकबर की सेना को पीछे ढकेल दिया। महाराणा प्रताप का साथ एकमात्र मुस्लिम सरदार हकीम खां सूरी ने दिया। हल्दीघाटी का युद्ध कई दिनों तक चला। कई हजार सैनिकों ने अपने प्राणों की आहूति दी। महिलाओं और बच्चों ने भी अन्न-पानी का त्याग कर युद्ध में अपनी भूमिका अदा की। इतिहासकारों का मानना है कि हल्दीघाटी के युद्ध में कोई विजय नहीं हुआ था किन्तु यह भी सच है कि अकबर अपनी सेना लेकर पीछे हट गया था। महारणा प्रताप का  हौसला देख अकबर मन ही मन महाराणा प्रताप की बहादूरी का कायल हो गया था। उसने कई प्रयत्न किए किंतु महाराणा प्रताप को कभी नहीं पकड़ पाया। महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 में उनकी नई राजधानी चावंड में हुआ।  

महाराणा प्रताप और चेतक का  रिश्ता

महारणा प्रताप बड़े योद्धा थे, उन्हीं की तरह उनका घोड़ा चेतक भी बहादूर था। चेतक में समझदारी, संवेदना भरपूर थी। यह नीले रंग का अफगानी घोड़ा था। महराणा प्रताप के साथ ही चेतक का नाम भी लिया जाता है। कई युद्धों में चेतक ने अपनी फूर्ति से महाराणा प्रताप को जीत दिलाई। महाराणा प्रताप जितना प्यार चेतक से करते थे उतना ही प्यार चेतक भी उनसे करता था। यही कारण है कि हल्दीघाटी में चेतक की समाधी भी बनी हुई है जिसे लोग उसी सम्मान से देखते हैं जैसे महारणा प्रताप को देखते हैं।  

सम्मान के साथ मनाई जाती है महाराणा प्रताप की जंयती

महाराणा प्रताप को अद्भुत सम्मान दिया जाता है क्योंकि उन्हें बहादुरी, वीरता, , देशभक्ति और आजादी की भावना देश के प्रति गर्व पैदा करती है। भारतवर्ष धन्य है जहां माहारणा प्रताप जैसे योद्धा ने जन्म लिया। आज भी प्रतिवर्ष महाराणा प्रताप की जंयती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। जगह-जगह पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाराणा प्रताप जयंती पर उनकी याद में विशेष पूजा और जुलूस आयोजित किए जाते हैं। कई सांस्कृतिक, और विचार विमर्श करने  के लिए संगोष्ठियां भी  आयोजित की जाती हैं।

महाराणा प्रताप जंयती के बारे में अँग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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