भारत का पश्चिमी राज्य राजस्थान विभिन्न त्यौहारों एवं मेलों का स्थल है। राजस्थान जितना अपने राजशाही इतिहास के लिए प्रसिद्ध है उतना ही अपने खान-पान और रिति-रिवाजों के लिए भी प्रसिद्ध है। राजस्थान के प्रत्येक शहर का अपनी ही इतिहास एवं उत्सव है। यहां इतिहास एवं कला-संस्कृति को दर्शाते कई मेलों एवं त्यौहारों का आयोजन किया जाता है जो राजस्थान की सभ्यता के साथ-साथ भारत को भी प्रदर्शित करते हैं। राजस्थान का रजवाड़ी शहर जोधपुर का मारवाड़ उत्सव एक अनूठा उत्सव है। जो एक माध्मय है लोगों को राजस्थान की संस्कृति से जोड़े रखने का। मारवाड़ महोत्सव जोधपुर में आश्विन के महीने में यानि सिंतबर-अक्टूबर के माह में दो दिवसीय उत्सव के रुप में आयोजित किया जाता है। इस दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव में राज्स्थान का इतिहास, भव्य भवन, पैलेस, मंदौर एवं मेहारनगढ़ के किलों को जानने का अवसर प्राप्त होता है। इस मेले में देश-विदेश से कई पर्यटक सम्मलित होते हैं। जिन्हें इस राजस्थान की पंरपरा से जुड़ने का शुभ अवसर प्राप्त होता है। यह महोत्सव उन कलाकारों के लिए भी बेहद खास है जिन्हें कई कारणों से अपनी कला को प्रदर्शित करने का मौका नहीं मिलता। मारवाड़ महोत्सव के जरिए कई कलाकार इस मेले में अपनी कला को प्रदर्शित कर वाहवाही बटौरते हैं। यह मेला एक वार्षिक मेला है जो अधिकांशतः अक्टूबर के महीने में आयोजित किया जाता है।
मारवाड़ महोत्सव

मारवाड़ महोत्सव की खासियत

जोधपुर का लोकप्रिय मारवाड़ महोत्सव राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना है। इस महोत्सव में लोक कला के साथ-साथ कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। महोत्सव के साथ ही मारवाड़ पर्यटकों के आने की संख्या भी बढ़ जाता है इस समारोह में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक जोधपुर पहुंचते है। महोत्सव की शुरुआत सांस्कृतिक शोभा यात्रा के साथ होती है। शोभा यात्रा में विभिन्न लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलते हैं शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल होंते हैं। शोभा यात्रा का शहर में विभिन्न स्थान पर जोरदार स्वागत किया जाता है। जिसके बाद मूंछ प्रतियोगिता, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, मारवाड़ श्री, रस्साकशी, मटका दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। शाम के समय में राजस्थानी लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाती है, जिनमें राजस्थानी लोक नृत्य घूमर एवं लोकल गीत शामिल होते हैं। साथ ही ग्रामीण जीवन पर आधारित प्रदर्शनी, रेत के टीलों पर ऊंट की सवारी इत्यादि का भी आयोजन किया जाता है। मारवाड़ मेले में कालीन से लेकर चूरन, अचार, जूते-चप्पल, लाह की चूडियां, सिरामिक टेराकोटा की पेंटिंग व कलाकृतियां से लेकर फर्नीचर, मुरब्बे, मार्बल की दुकानें तक सजी होंती है जिन्हें स्थानिय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी बड़े जोश के साथ खरीदते हैं। इस मेले में गहनों से लेकर इलेक्ट्रिक उपकरण तक बिकते हैं। इस मेले में धार्मिक बातो का भी बोलाबाला होता है। मेले में राणी सती दादी और ढांढन वाली दादी का दरबार सजा होता है, मेले में राज्स्थान का लज़ीज खाना भी पर्यटकों के मुंह में पानी लाने का काम करता है। मेले में राजस्थान की चौकी-ढाणी की तर्ज पर दाल बाटी चूरमा से लेकर तरह-तरह के राजस्थानी व्यंजन मिलते हैं वहीं इडली-दोसा के साथ चाट-गोलगप्पा भी मेले में लोगों के लुभाते हैं। यही कारण है कि मेले में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

कैसे पहुंचे 

मारवार महोत्सव, जोधपुर में आयोजित होता है जिसे राज्स्थान का नीला शहर भी कहा जाता है। यह जगह राजस्थान में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। इस शहर में परिवहन के सभी साधनों आसानी से सुलभ है।

हवाईजहाज द्वारा

जोधपुर आने के लिए से दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, जयपुर, उदयपुर जैसे अन्य प्रमुख शहरों से सीधे जोधपुर के लिए उड़ान उपलब्ध है। जोधपुर इन शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

ट्रेन द्वारा
जोधपुर पहुंचने का दूसरा सुविधाजनक तरीका ट्रेन से है। जोधपुर ब्रॉड गेज पर है और उत्तर-पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत आता है इसलिए भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। जयपुर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगाल, बैंगलौर इत्यादि से सीधी ट्रेनें जोधपुर के लए उपलब्ध है। शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स भी इस शानदार शहर के शानदार सफर तक पहुंचाती है।

सड़क द्वारा
जोधपुर राजस्थान के कई शहरों जैसे जयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर तक सड़कों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है,। कोई भी दिल्ली, अहमदाबाद, आगरा आदि से जोधपुर के लिए सीधी बस पकड़ सकता है।

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