आज के समय में बड़ी संख्या में लोग तम्बाकू का किसी ना किसी रुप में प्रयोग कर रहे हैं। सिगरेट, गुटखा, बीड़ी, तंबाकू इत्यादि कई रुपों में वो अपने शरीर में इस जहर को घोल रहे हैं। आज विश्व की आबादी का एक बड़ा हिस्सा तंबाकू की गिरफ्त में आ गया है। लोग जाने-अनजाने में स्वंय ही अपनी मौत को न्यौता दे रहे हैं। तम्बाकू से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य है लोगों को तम्बाकू से दूर कर उन्हें फिर से नई जिंदगी देना। तंबाकू में अत्याधिक नशे की आदत डालने वाला निकोटीन नामक पदार्थ होता है। निकोटीन आपको कुछ समय के लिए बेहत्तर महसूस कराता हैं, लेकिन इसका लंबे समय तक उपयोग, आपके हृदय, फेफड़े और पेट के साथ-साथ आपके तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता हैं। एक अवधि के बाद, व्यक्ति का शरीर, शारीरिक और भावनात्मक स्तर पर निकोटीन का आदी हो जाता है तथा अंत में व्यक्ति गंभीर स्वास्थ्यगत समस्याओं से पीड़ित हो जाता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के जरिए लोगों को तम्बाकू से होने वाली बीमारियों के प्रति अवगत कराया जाता है। विश्व तंबाकू दिवस सार्वजनिक स्वास्थ्य पर तम्बाकू उपयोग के प्रभाव और व्यक्तिगत तम्बाकू निर्भरता को कम करने के लिए ध्यान देने के लिए समर्पित कार्यक्रम है। आज तंबाकू से हो रही हानी के देखते हुए दुनिया भर के सभी देशों की सरकारें तम्बाकू उत्पादों पर सख्त नियम लागू कर रही हैं। विश्व तंबाकू दिवस हर साल एक नई थीम के साथ मनाया जाता है। 2006 डब्लूएनटीडी के लिए वैश्विक विषय "तंबाकू: घातक रूप से किसी भी रूप में या छेड़छाड़" है, 2007 में थीम धूम्रपान मुक्त वातावरण पर केंद्रित थी। 2008 में विश्व नो तंबाकू दिवस का विषय "तंबाकू मुक्त युवा" था। 2009 में विश्व तंबाकू दिवस का विषय "तंबाकू स्वास्थ्य चेतावनी" था। साल 2018 का विषय तम्बाकू और ह्दय रोग था क्योंकि यह देखा जा रहा है कि तंबाकू का सेवन करने से ह्रदय पर आघाच पहुंचता है जिसके प्रति लोगों को जागरुक करना अति आवश्यक है। इस वर्ष तंबाकू निषेध दिवस 31 मई (रविवार) को मनाया जाएगा।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का इतिहास

विश्व धूम्रपान निषेध दिवस अथवा 'विश्व तम्बाकू निषेध दिवस' अथवा 'अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस' प्रत्येक वर्ष 31 मई को मनाया जाता है। तम्बाकू से होने वाले नुक़सान को देखते हुए साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य देशों ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके द्वारा 7 अप्रैल, 1988 से इस दिवस को मनाने का फ़ैसला किया गया। इसके बाद हर 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फ़ैसला किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने 31 मई का दिन निर्धारित करके धूम्रपान के सेवन से होने वाली हानियों और ख़तरों से विश्व जनमत को अवगत कराके इसके उत्पाद एवं सेवन को कम करने की दिशा में आधारभूत कार्यवाही करने का प्रयास किया है। यह दिन तम्बाकू से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों को कम करने पर केंद्रित है। तंबाकू की खपत के कारण सालाना 5.4 मिलियन मौतें पूरी दुनिया में होती हैं। डब्ल्यूएचओ ने 31 मई, 2008 से किसी भी माध्यम से तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में आज तम्बाकू का बिक्री हो रही है। तम्बाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन के अनुच्छेद 11 के अनुसार, तंबाकू के उपयोग के हानिकारक प्रभावों को दर्शाते हुए स्पष्ट स्वास्थ्य चेतावनियां या अन्य चित्रमय संदेश सभी तंबाकू उत्पादों पर मुद्रित किए जाने चाहिए। यह सभी देशों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। यह तंबाकू नियंत्रण के लिए डब्ल्यूएचओ एमपीओईआर नीति पैकेज की छह महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक है। भारत में तबांकू से संबंधित सभी उत्पादों को तंबाकू सेवन के खतरों को उजागर करने के लिए मुंह और गले के कैंसर के रोगियों के चित्र तम्बाकू संबधी पदार्थों पर लगाए गए हैं। उस पर साफतौर से चेतावनी दी गई है कि तम्बाकू से मुंह और गले का कैंसर होता है किन्तु फिर भी लोग प्रतिदिन लाखों की संख्या में तम्बाकू का सेवन करते हैं। भारत में प्रत्येक फिल्म से पहले तम्बाकू से होने वाले नुकसान का विज्ञापन भी चलाया जाता है ताकि लोग तम्बाकू से होने वाले नुकसान को समझे और अपने सगे-संबधियों को भी इसका प्रयोग करने से रोकें।

तम्बाकू का प्रयोग करने के आंकड़े

साल 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तंबाकू व धूम्रपान के अन्य उत्पादों से होने वाली बीमारियों और मौतों की रोकथाम को ध्यान में रखकर इस वर्ष की थीम 'टोबेको और कार्डियो वेस्कुलर डिसीज (तंबाकू और हृदय रोग )' रखी थी'ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण' (जीएटीएस-दो) 2016-17 के अनुसार, भारत में धुआं रहित तंबाकू का सेवन धूम्रपान से कहीं अधिक है। वर्तमान में 42.4 फीसदी पुरुष, 14.2 फीसदी महिलाएं और सभी वयस्कों में 28.8 फीसदी धूम्रपान करते हैं या फिर धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस समय 19 फीसदी पुरुष, 2 फीसदी महिलाएं और 10.7 फीसदी वयस्क धूम्रपान करते हैं, जबकि 29.6 फीसदी पुरुष, 12.8 फीसदी महिलाएं और 21.4 फीसदी वयस्क धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। 19.9 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं जिनकी संख्या सिगरेट या बीड़ी का उपयोग करने वाले 10 करोड़ लोगों से कहीं अधिक हैं। 2005-06 में आयोजित एक राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 15-49 साल के आयु वर्ग में 57 प्रतिशत से अधिक पुरुष तंबाकू का उपभोग करते हैं और इस आयु वर्ग में 10.9 प्रतिशत महिलाएं तम्बाकू का भी उपयोग करती हैं। वर्ष 2010 में वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण ( गेट्स )के अनुसार दिल्ली में 24.3 प्रतिशत करीब 30 लाख 73 हजार 632 लोग किसी ना किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और इनमें से 10 हजार 600 लोगों की मृत्यु तंबाकू से संबधित रोगों के कारण प्रतिवर्ष हो जाती है। इनमें किशोर व किशोरियां भी शामिल हैं। जब 2010 में यह सर्वे हुआ तब 35 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे थे और आज 2017 में यह आंकड़ा बड़े पैमाने पर बढ़ चुका है। तम्बाकू के धुंए में हाइड्रोजन सयनायद, फर्मेल्हिदाईड, लेड आर्सेनिक, बेंजीन, अमोनिया जैसे हजारों किस्म के रसायन होते हैं।

महिलाओं में बढ़ता तम्बाकू का प्रयोग

आज के समय में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं तंबाकू का सेवन कर रही हैं। पुरुषों की बाराबरी करते हुए आज महिलाएं भी तम्बाकू के नशे से ग्रसित हो चुकी हैं। वो सिगरेट, हुक्का इत्यादि के जरिए तम्बाकू का बेधड़क प्रयोग कर रही है। शहरी सभ्यता में तो महिलाओं का सिगरेट पीना उन्हें आधुनिक प्रतित होता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं तम्बाकू और हुक्के के प्रयोग पर जोर देती हैं। भारत में 48 फीसदी पुरुष और 20 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रुप में तंबाकू का प्रयोग करते है। महिलाएं सिगरेट एवं अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन का शौक रखती हैं, इनमें देश के साथ- साथ प्रदेश की शहरी व ग्रामीण महिलाएं भी इसमें शामिल है। गेटस सर्वे के अनुसार देश की दस फीसदी लड़कियेां ने स्वंय सिगरेट पीने की बात को स्वीकारा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपेार्ट ग्लोबल टोबेको एपिडेमिक पर अगर नजर डालें तो पता चलता है कि महिलाओं के बीच तंबाकू का सेवन निरंतर बढ़ता जा रहा है। अमेरिका में हुए एक रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि अमेरिकी औरतों को पुरुषों की तुलना में ज्यादा लंग्स कैंसर पाए गए। यह रिसर्च राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और अमेरिकन कैंसर सोसायटी की तरफ से की गई, जो न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई थी।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस

तम्बाकू से प्रतिवर्ष 50 लाख लोगों की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा के आधार पर इस समय समूचे विश्व में प्रतिवर्ष 50 लाख से अधिक व्यक्ति धूम्रपान के सेवन के कारण अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यदि इस समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में कोई प्रभावी क़दम नहीं उठाया गया तो वर्ष 2030 में धूम्रपान के सेवन से मरने वाले व्यक्तियों की संख्या प्रतिवर्ष 80 लाख से अधिक हो जायेगी। धूम्रपान, इसका सेवन करने वालों में से आधे व्यक्तियों की मृत्यु का कारण बन रहा है और औसतन इससे उनकी 15 वर्ष आयु कम हो रही है। हर प्रकार का धूम्रपान- 90 प्रतिशत से अधिक फेफड़े के कैंसर, ब्रैन हैम्ब्रेज और पक्षाघात का महत्त्वपूर्ण कारण है।

तम्बाकू के सेवन से होने वाली परेशानियां

तम्बाकू के सेवन से कई तरह की परेशानियां हो सकती है। तम्बाकू के सेवन से सांस लेन में दिक्कत होती है। थकान बनी रहती है। भूख नहीं लगती। नींद भी व्यक्ति को सही से नहीं आती। हर समय तनाव बना रहता है। लगातार तम्बाकू के प्रयोग से व्यक्ति से खाना तक नहीं खाया जाता। गले से खाना निगलने में परेशानी होती है। पूरा मुंह तक नहीं खुलता। लबें समय तक खांसी बनी रहती है। धीरे-धीरे व्यक्ति का शरीरी शिथिल हो जाता है। खांसने थूकने में खून भी आने लग जाता है जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावनना अत्याधिक बढ़ जाती है। महिलाओं के धूम्रापन करने से बच्चों को काफी नुकसान होता है। गर्भवती महिला के आस पास तम्बाकू का सेवन या गर्भवती महिला द्वारा तम्बाकू के सेवन से होने वाला बच्चा अपंग पैदा हो सकता है। उसे कई रोग हो सकते हैं। महिलाओं के लगातार तम्बाकू का सेवन करने से बांझपन का खतरा अत्याधिक बढ़ जाता है। पुरुषों में भी नपुसंकता की बढ़ोतरी धूम्रपान करने से होती है। स्वास्थ्य सबंधी भी कई नुकसान तम्बाकू का सेवन करने से होते हें। लम्बे समय तक सिगरेट सेवन के दूसरे दुष्परिणाम- मुंह, गर्भाशय, गुर्दे और पाचक ग्रंथि के कैंसर हैं। विभिन्न शोधों से जो परिणाम सामने आये हैं वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि धूम्रपान, रक्त संचार की व्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव डालता है।

ऐसे छोड़ सकते हैं नशा

व्यक्ति यदि एक बार किसी तरह के नशे में फंस जाता है तो उसका इससे निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है किन्तु यह नामुमकिन नहीं है। यदि कोई व्यकित सच में धूम्रपान का त्याग कर एक नई जिंदगी जीना चाहता है तो सर्वप्रथम उसे स्वंय पर यह भरोसा होना चाहिए कि वो ऐसा कर सकता है। आत्मविश्वास की इसमें बहुत आवश्यकता होती है। आज कई दवाईयां, चिकित्सक सहायता के लिए उपलब्ध है। सरकारी गैर सरकारी कई नशा मुक्ति कैन्द्र खोले गए हैं। नशा छेड़ने के लिए व्यक्ति च्यूइंगम, स्प्रे या इनहेलर का भी सहारा ले सकते हैं। खाने में एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजों को शामिल करने से भी नशे से दूर हुआ जा सकता है। व्यक्ति को अकेले रहने से ज्यादा परिवार और अच्छे दोस्तो के साथ समय बिताना चाहिए ताकि उसका मन लगा रहे और वह धूम्रपान का सेवन ना करें।

नशा छोड़ने के फायदे

धूम्रपान ना करने के कई फायदे है। धूम्रपान बंद करने के 12 मिनट के भीतर ही आपकी उच्च हृदय गति और रक्त चाप में कमी दिखने लगेगी। 12 घंटे बाद अपने खून में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर घटकर सामान्य पर पहुंच जाएगा। वहीं दो से 12 हफ्तों में आपके शरीर के भीतर खून के प्रवाह और फेफड़ों की क्षमता बढ़ जाएगी। धूम्रपान छोड़े हुए एक साल बीतते-बीतते आप में दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा धूम्रपान करने वालों की तुलना में आधा तक रह जाएगा। वहीं पांच साल तक पहुंचने पर मस्तिष्काघात का खतरा नॉन स्मोकर के स्तर पर पहुंच जाएगा। धूम्रपान से दूर रहने पर आप में फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा धूम्रपान करने वाले की तुलना में आधे पर पहुंच जाएगा। वहीं मुंह, गले, मूत्राशय, गर्भाशय और अगन्याशय में कैंसर का खतरा भी कम हो जाएगा। धूम्रपान छोड़ने से आप में नपुंसकता की आशंका कम होती है। इसके अलावा महिलाओं में गर्भधारण में कठिनाई, गर्भपात, समय से पहले जन्म या जन्म के समय बच्चे का वजन बेहद कम होने जैसी समस्याएं भी कम होती है। धूम्रपान छोड़ने से पैसों की भी बहुत बचत होती है। फिजुलखर्ची से आप बच सकते है। धूम्रापन छोड़ने से व्यक्ति स्वंय के साथ-साथ अपने घर-परिवार और आस पड़ोस को भी स्वस्थ व खुश रख सकता है।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के कार्यक्रम

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर लोगों को तम्बाकू के सेवन से रोकने के लिए कई तरह के जागरुकतापूर्ण कार्यक्रम पूरे विश्व में चलाए जाते हैं। लोगों को तम्बाकू से होने वाले गंभीर रोगों के बारे में बताया जाता है। कई स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते हैं जहां रोगियों की मुफ्त जांच की जाती है। कई सरकारी और गैर सरकारी सगंठन कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करते है। नुक्कड़ नाटक, नृत्य, गायन, शेर-शायरी, लेखन प्रतियोगिता, पेंटिग प्रदर्शनी, स्लोगन इत्यादि के जरिए तम्बाकू संबधी विषयों पर लोगों को जागरुक करते हैं। कई संगोष्ठियां, चर्चाएं, वार्तालाप आयोजित की जाती हैष सेमिनार के जरिए भी लोगों को तम्बाकू से होने वाले नुकसान के प्रति जागरुक किया जाता है। समाचार पत्रों, टेलिविजनस रेडियों पर भी विज्ञापनों और नामी हस्तियों के जरिए तम्बाकू से होने वाली हानि के बारे में बताया जाता है। कई रैलियां, सभाएं आयोजित की जाती है। कैंसर मरीजों सहायता संघ नियमित रूप से लोगों को शिक्षित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। विश्व के तंबाकू दिवस मनाने के लिए जनता के लिए नि: शुल्क जागरूकता व्याख्यान और स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए जाते हैं तंबाकू के नियमित सेवन से फेफड़ों के कैंसर होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि तंबाकू में क्रोमियम, आर्सेनिक, बंजोपाइरींस, निकोटीन, नाइट्रोसामाइंस जैसे तत्व बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। बता दें कि यह सभी तत्व कैंसर पैदा करने वाले सेल्स को बढ़ावा देते हैं। इससे बचाव के लिए ही लोगों में यह भावना फैलाई जाती है कि वो तंबाकू का प्रयोग ना करें और एक स्वस्थ जीवन जीएं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस
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