भारत में कई महात्माओं ने जन्म लिया है। उन्हीं महात्माओं में से एक हैं सांई तेउन राम। सांई तेउन राम 19 वीं शताब्दी के गुरु हैं। सांई तेंउन राम की जयंती को पूरे भारतवर्ष के हिन्दू समूदाय महान भक्ति, आस्था और समर्पण की भावना के साथ मनाते हैं। सांई तेउन राम जयंती महान संत तेउन राम की याद में मनाई जाती है। जिन्हें प्यार से लोग सांई भी कहते हैं। सांई तेउन राम को उनकी महान शिक्षाओं, बहुमूल्य उपदेशों, और असिमित ज्ञान के लिए जाना जाता है। संत सांई राम सेवा के लिए भी काफी प्रसिद्ध थे। हिन्दूंओ में उनकी छवी एक रहस्यवादी संत के रुप में है जिन्होंने हिन्दूओं को समृद्ध बनाया। संत सांई तेउन राम सत्संग, भजन जैसे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों में भक्ति और विश्वास की भावना प्रवाहित करते थे जिसका कारण है कि आज हिन्दू धर्म के लोग भी भजन, सत्संग कर सांई तेउन राम को याद किया करते हैं। संत सांई तेउन राम अपने नियमित उपदेशों के लिए भी जाने जाते हैं। वो अपने उपदेशों के जरिए समाज को बुराईयों से बचाते थे। आज हिन्दूंवादी लोग उनके इसी उपदेशों के सम्मान में उनकी जयंती मनाते हैं।

सांई तेउन राम

सांई तेन राम का जीवन परिचय

सांई तेउन राम का जन्म 6 जुलाई 1887 को धार्मिक नदी सिंधु के पास बसे गांव खांडू में हुआ था। उनके पिता का नाम चेलाराम एवं माता का नाम कृष्णा देवी था। कृष्णा देवी ने अपनी पूरा जीवन गांव में आने वालें साधु-संतो की सेवा में लगा दिया था। सांई तेउन राम ने 1943 में हैदराबाद के प्रेम प्रकाश आश्रम में गुरु स्वामी माधवदास जी महाराज के समक्ष शरीर त्याग दिया था। सांई तेउन राम को मानव सेवा के लिए भी हमेशा याद किया जाता है। अपनी मां की तरह ही वो भी मानव सेवा करने में आगे रहते थे। उनका उद्देश्य मानव मूल्यों का विकास कर उसे अधिक से अधिक सीमा तक फैलाना था। जिसके कारण उन्हें महान संतो की श्रेणी में रखा गया है। भारतवर्ष में कई संतो ने कई महान कार्य किए है पर सभी को याद रखना मुश्किल है लेकिन सांई तेउन राम ऐसे अध्यात्मिक गुरु हैं जिन्होंने अपना जीवन आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने में लगा दिया। उनका मानना था कि इससे मनुष्यों का आंतरिक विकास होगा। उनके ज्ञान के कारण कई लोगों में अध्यात्मिक विकास हुआ जिससे वह स्वंय को औऱ बेहतर कर पाएं हैं। इसलिए सांई तेउन राम आज हिन्दू समाज के प्रमुख गुरु बने है। हिन्दूजन सांई तेउन राम को अपना अध्यात्मिक गुरु मानते हैं।

सांई तेउन राम जयंती सामारोह

महान संत सांई तेउन राम की जयंती पर विशेषकर हिन्दूजन विशेष प्रार्थना कर सांई तेउन राम की जयंती मनाते हैं। जिस तरह से उन्होंने समाज की सेवा की थी उसी तरह उन्हें आदर्श मान हिन्दू जन जरुरतमंदो की इस दिन सेवा करते हैं। । सांई तेउन राम का नाम हिन्दू संस्कृति के समानार्थी है उनके अधिकांश भजन और धार्मिक ग्रंथ विशेष उल्लेख के साथ पाए जाते हैं। उन्होंने एक संत का रुप धारण कर मान जाति की सेवा व उनके कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत कर दिया। सांई तेउन राम ने केवल हिन्दूओं को ही ज्ञान नहीं दिया अपितु हर जाति, धर्म के लोगों को एकत्रित होकर जीवन व्यापान करने का भी उपदेश दिया। उन्हें लोगों के बीच एकता फैलाने के लिए भी याद किया जाता है। सतगुरु स्वामी तेउनराम जी महाराज अपने दादा सांई तेउन राम का जन्मदिवस सम्मान और भक्ति के मनाते हैं। लोग इस दिन प्रण लेते हैं कि वो सांई द्वारा दिखाए गए सच्चाई और अच्छाई के मार्ग पर दी चलेगें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हर दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, मिठाई वस्त्र इत्यादि वितरित किए जाते हैं, दान-पुण्य के कार्यक्रम हर जगह आयोजित किए जाते हैं। दुनियाभर के हिन्दू इस दिन अपनी सक्रिय रुप से भागीदारी निभाते हैं और इस उत्सव को मनाते हैं। यह अवसर भारत में एक विशेष त्यौहार के रुप में मनाया जाता है जिके माध्यम से सभी संतो को एक साथ याद किया जाता है। यह उत्सव हर साल समृद्ध तरीके से आयोजित किए जाते हैं जो ना केवल हिंदू धर्म के लोग आयोजित करते हैं बल्कि अन्य समुदायों के लोग भी इस उत्सव में शामिल होते हैं। इस उत्सव का उद्देश्य मानव जाति के बीच शांति और सद्भाव बनाए रखना है जिससे मानव निस्वार्थ सेवा की भावना लेकर प्रेमपूर्वक एक साथ रहें।

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