गोवा जितना अपनी खूबसूरती और खान-पान के लिए प्रसिद्ध है, उतने ही इसके त्यौहार भी प्रसिद्ध हैं। गोवा में ईसाई धर्म के त्यौहारों की अधिकता रहती है लेकिन इसके बाद भी वो सभी त्यौहारों को स्वंय से जोड़े रखता है। गोवा में इसी क्रम में मनाए जाने वाला त्यौहार साओ जोआओ है। साओ जोआओ को सेंट जॉन द बैपिस्ट भी कहते है। इस दिन की दावत प्रतिवर्ष 24 जून को दी जाती है। इस त्यौहार को गोवावासी बहुत ही उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। साओ जोआओ का जश्न लगभग 175 सालों से मनाया जा रहा है। यह एक अद्वितिय पर्व है। इस दिन गोवा में पुरुष खासकर के युवा लड़के कुओं, तलाबों और नदियों में डाले गए तोहफों को पानी में कूद कर ढूंढने का प्रयास करते है।

क्या है साओ जोआओ को मनाने का इतिहास

गोवा में साओ जोआओ मनाने के पीछे एक कहानी छिपी है। जो हमें  जीसस के जन्म के समय में ले जाती है। पवित्र बाइबिल में लिखी गई कहानी के अनुसार, जीजस ने अपनी मां के गर्भ में इस त्यौहार की उत्पत्ति देखी थी।  जब उनकी मां मैरी ने यीशु को जन्म देने के लिए सेंट एलिजाबेथ (सेंट जॉन द बैपिस्ट की मां) ने दौरा किया। तब इस अवसर ने उन्हें खुशी से बांध कर रख दिया। ईसाई जीसस के जन्म की बात सुनी, जिसे सुन वे बहुत ही आनंदित हुए। कुछ सालों बाद, जॉर्डन नदी के किनारे पर जीसस क्राइस्ट को संत जॉन ने ईसाई बनाने की रस्म कराई । उत्तरी गोवा में साओ जोआओ का उत्सव सबसे अधिक उत्साहजनक होता है। जबकि दक्षिण गोवा में इसे खास तरह से नहीं मनाया जाता। उत्तरी गोवा में लोग कुएँ और तलाबों में डुबकी लगाते हैं और उसे जॉन की माँ एलिज़ाबेथ की कोख का प्रतीक मानते है। पानी में डुबकी लगा आनंद लेना जीजस की खुशहाली को दर्शाता है जब वे अपनी माँ के कोख में थे। इस पर्व को गोवा में साओ जोआओ के नाम से जाना जाता है। यह पर्व उन जाने-पहचाने पर्वों में से एक है जिसमें, सारे ईसाई धर्म के लोग उत्साह के साथ भाग लेते हैं। इसे 'जॉन द बैपिस्ट' के पर्व के नाम से भी जाना जाता है। गोवा के सोकोररो गाँव में साओ जोआओ मानते लोग साओ जोआओ मॉनसून को आमंत्रित करने और उसका मज़ा लेने का भी पर्व है। असल में लोग यहाँ पर भारी बारिश में खेल कर उसका मज़ा लेते हैं। यह पर्व उन असामान्य पर्वों में से एक है जो लोगों को एक साथ एक दूसरे के पास लाता है। बस इतना ही नहीं, लोग पानी में कूद कर तोहफे ढूँढते हैं जो पानी में लोगों द्वारा ही डाले जाते हैं।

कैसे मनाते हैं साओ जोआओ उत्सव

गोवा का साओ जोआओ त्योहार लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का भी जरिया है। बारिश का आनंद लेने और पानी में कूदकर मज़ा लेने से पहले लोग वहाँ के पेय पदार्थ फेन्नी का आनंद लेते हैं। कार्निवाल के अंत में लज़ीज़ व्यंजनों का आनंद लेने की बारी आती है। लोग अपने मनपसंद के स्थानिय व्यंजनों और पेय पदार्थों का मज़ा लेते हैं। पर्व के दौरान सॉल्सेट तालुक पर वहाँ के लोक नृत्य को करने का भी रिवाज़ है। बार्डेज़ में रंग बिरंगे पारंपरिक तरीके से सजे नौकाओं की नौका दौड़ की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है। नौका दौड़ के लिए सजी नाव साओ जोआओ के उत्साहिक, हर्षोल्लास और मनोरंजन से भरे पर्व का मिश्रण है। यह कार्निवाल लोगों को एक साथ एक दूसरे के करीब लाता है। जॉन बैपिस्ट को  बाद में जॉर्डन नदी में यीशु मसीह का नाम दिया गया था।

साओ जोआओ की परंपराएं

कुछ परंपराएं सेंट जॉन द बैपिस्ट के त्यौहार से जुड़ी हैं जिनका वर्षों से अनुसरण किया जाता है। इस दिन युवाओं का जुलूस आयोजित किया जाता है, यह जुलूस सभी के दरवाजों पर जाता है और वहां से उपहार, शराब और फल इकट्ठा करता है। फिर सब लोग शहर के किसी भी जल निकाय में प्रार्थना करते हैं और वहां संग्रहणीय चीजें फेंक देते हैं। इसके अलावा युवा लड़के-लड़कियां अच्छा जीवन साथी पाने की प्रार्थना करते हैं। अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए मौसमी फल, फूल और सब्जियां तालाब में फेंक देते है जिसके बाद युवा कुओं और तालाबों में कूदते हैं और इन फेंके गए समानों को इक्टठा करते हैं। 'साओ जोआओ, साओ जोओ, विवा साओ जोओ' की आवाज़ें पूरे वातावरण में गूंजने लग जाती है। इस त्यौहार में नव विवाहित जोड़ों पर खासी नजर होती है। दुल्हन को वितरित करने के लिए आम, कटहल इत्यादि फल व सब्जियां दी जाती है। घरों में विशेष व्यजंन पकाए जाते हैं। मूल रुप से  सोरपोटेल के साथ ‘सानस’ (चावल का एक मीठा पकवान), कसा हुआ नारियल, किशमिश, गुड़िया 'पेटोडियो' नामक गुड़ और सब्जियों को बनाते है। जिसके बाद अन्य पारंपरिक भोजन सहित दामाद के लिए एक पूर्ण भोजन तैयार किया जाता है। लोग मौसमी फूलों से बना सुंदर तिआरा पहनते हैं जिन्हें 'कॉपल' कहा जाता है। दावत में कई साहसी खेल और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। जब चर्च पहुंचते हैं तो मोमबत्तियां जलाकर आतिशबाजियां की जाती है।
यह त्यौहार उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार में भी नौका दोड़ के साथ-साथ कई और खेल भी जोड़ दिए गए है। कई प्रतियोगिताएं भी इस दिन आयोजित की जाती हैं। गुलदस्ता बनाना, मेंढक दौड़ जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करके इस उत्सव को बढ़ावा देने के लिए गोवा सरकार भी लगातार प्रयासरत है। यह उत्सव युवाओं को निडर भी बनाता है। इस उत्सव के जरिए गोवावासी प्रार्थना करते हैं कि उनका यह साल सुखपूर्वक बिते।

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