संत फ्रांसिस जेवियर का पर्व हर साल दिसंबर में गोवा में मनाया जाता है। इस दिन को समर्पण और सेवा के जश्न के रुप में मानते हैं। सेंट फ्रांसिस जेवियर ने भारत, एशिया और यूरोप में ईसाई विश्वास और मिशनरी कार्य के अपने दृष्टिकोण के माध्यम से खुद को प्रतिबद्ध किया था। जिसके फलस्वरुप गोवा में पणजी के बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च में पिछले 450 वर्षों से सेंट फ्रांसिस जेवियर की डेड बॉडी रखी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि इस मृत शरीर में ऐसी दिव्य शक्तियां हैं जिसकी वजह से इतने वर्षों बाद भी ये शरीर सड़ा नही है। माना जाता है कि संत जेवियर के शव को 3 दिसंबर को दफनाया गया था, इसी दिन को उनकी मृत्यु का सम्मान करने के लिए समारोह आयोजित किए जाते हैं। 7 अप्रैल, 1506 को स्पेन में पैदा हुए, सेंटएक्सियर 1543 में गोवा के पुर्तगाली वाइसराय के साथ भारत आए, और तुरंत गोवा लोगों को प्रभावित करने का कार्य शुरू किया। वह एक महान कैथोलिक मिशनरी थे, जिन्होंने एशिया के लोगों को यीशु मसीह की सुसमाचार का प्रचार किया था।

 
संत फ्रांसिस जेवियर उत्सव

संत जेवियर का जीवन परिचय

सेंट फ्रांसिस जेवियर के बारे में किंवदंतियों का कहना है कि उनकी एक चिकित्सा शक्ति थी और जिसके कारण मृत्यु की 5 शताब्दियों के बाद भी उनका शरीर विघटित नहीं हुआ था। सेंट फ्रांसिस जेवियर, संत से पहले एक सिपाही थे। वे इग्नाटियस लोयोला के छात्र थे। इग्नाटियस लोयोला जीसस के आदेशों के संस्थापक थे। पुर्तगाल के राजा जॉन थर्ड और उस वक्त के पोप ने जेसुइट मिशनरी बनाकर फ्रांसिस जेवियर को धर्म के प्रचार के लिए भारत भेजा था।  उन्होंने भारत समेत चीन, जापान के कई लोगों को ईसाई धर्म में दीक्षा दी। उनकी मृत्यु चीन की एक समुद्र यात्रा के दौरान हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि जेवियर ने मृत्यु से पहले शिष्यों को उनका शव गोवा में दफनाने को कहा था। जिसके बाद फ्रांसिस जेवियर की इच्छा के मुताबिक उनका पार्थिव गोवा में दफनाया गया, लेकिन कुछ सालों बाद रोम से आए संतों के डेलिगेशन ने उनके शव को कब्र से बाहर निकालकर फ्रांसिस जेवियर चर्च में दोबारा दफनाया। ऐसा कहा जाता है कि कुल तीन बार उनके शव को दफनाया गया। पर हर बार संत का शरीर उसी ताजा अवस्था में था जैसे उन्हें पहले दफनाया गया था। यह कहानी भी प्रचलित है कि संत के शरीर में दिव्य शक्तियां हैं। हर दस साल बाद उनकी मृत्यु की सालगिरह पर, सेंट जेवियर के मृत शरीर को बाहर निकाला जाता रहा है। उनके दर्शन करने के लिए पूरे भारत के लोग संत की झलक के लिए चर्च आते हैं। ।

 

संत फ्रांसिस जेवियर उत्सव

सेंट फ्रांसिस जेवियर का पार्थिव शरीर आज भी बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस के चर्च में रखा है। हर 10 साल में ये बॉडी दर्शन के लिए रखी जाती है। 2014 में आखिरी बार उनके शरीर को को दर्शन के लिए निकाला गया था। उनके शरीर को कांच के एक ताबूत में रखा गया है। आज भी ये शरीर सड़ा नहीं है। चूंकि शरीर की स्थिति स्पष्ट रूप से बिगड़ गई थी, अब शरीर प्रदर्शित नहीं होता है। लोग हर साल गोवा में सेंट फ्रांसिस जेवियर के पर्व मनाने के लिए चर्च ऑफ बोम जीसस जाते हैं और तीर्थयात्रा कुछ परिवारों के लिए एक पिकनिक में बदल जाती है, क्योंकि वे स्ट्रीमर्स के साथ सजाए गए छोटे लेनों में खरीदारी करते हैं। चर्च साइट का माहौल खुशनुमा और उत्सव से परिपूर्ण होता है। संत जेवियर आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है। इस उत्सव में सम्मिलित होकर लोग उनके समक्ष प्रार्थनाएं करत हैं लोगों का मानना है कि संत के दर्शन मात्र से ही उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएगीं।

 

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