माना जाता है कि तुलसी जी का विवाह जिस भक्त ने करवाया उसका बेड़ा पार हो जाता है। घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं रहती। सब अड़चनें दूर होती हैं और खुशियां ही खुशियां आ जाती हैं। तुलसी विवाह की रस्में भी लगभग आम विवाह की तरह ही हैं। इसमें भी पंडाल लगते हैं दावते दी जाती हैं। विवाह गीत गाए जाते हैं। चलिये आपको बताते हैं कि पूजा के लिया क्या क्या सामग्री चाहिए और क्या क्या रीति रिवाज हैं।


पूजा सामग्री

-तुलसी का पौधा
-लाल रंग की ओढ़नी
-गन्ना, हल्दी, घंटी, अगरबत्ती
-मौली, दीपक
-चावल, पूरी, शकरकंद, खीर, लाल कद्दू, आंवला, इमली
-सुहाग पिटारी, मेंहगी, काजल, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी बगैरह।
-अलग अलग पकवान और मिठाई

पूजा विधि

-आस पड़ोस के लोगों और रिश्तेदारों को इस दिन विवाह का न्योता दें। सभी लोग ठीक वैसे ही तैयार हों जैसे घर में कोई शादी समारोह होने पर तैयार होते हैं।
-तुलसी के पौधे को आंगन या छत के बिलकुल बीच में रखें।
-तुलसी के ऊपर गन्ने का मंडप सजाएं।
-तुलसी पर सुहाग सामग्री के साथ लाल चुनरी चढ़ाएं। 
- गमले में सालिग्राम जी रखें।
- तुलसी और सालिग्राम जी पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं। 
-गन्ने के मंडप पर भी हल्दी का लेप करें।
-सालिग्राम जी पर तिल चढ़ाएं
 -भाजी, मूली़ बेर और आंवला जैसी सामग्री चढ़ाने के लिये रखें।
- इसके बाद श्री गणेश भगवान की वंदना से पूजा आरम्भ करने के बाद ॐ तुलस्यै नाम: का जाप करते हुए तुलसी की पूजा करें.
-सभी देवताओं का नाम लें और उन्हें भी धूप बत्ती दिखाएँ.
-एक नारियल लें और उसे तुलसी माता के समक्ष टिके के रूप में चढ़ा दें.
-भगवान शालिग्राम जी की मूर्ति को अपने हाथ में लेकर तुलसी माता के पौधे की सात बार परिक्रमा करें. इस प्रकार तुलसी विवाह तथा तुलसी पूजा सम्पन्न हो जायेगी.
अगर किसी को तुलसी विवाह की पूरी रस्में आती हैं तो ठीक है अन्यथा पंडित बुलवाकर भी विवाह संपन्न करवाया जा सकता है।

तुलसी विवाह पूजा को वीडियो के जरिये समझें





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April (Chaitra/Baisakh)