उतरालीकाऊ पूरम उत्सवदक्षिण भारत के उत्तरी केरला के तिर्स्सुर जिले में वाडक्कांचेररी श्री ऋतीरा महाकालीकाऊ मंदिर में केरल की उत्सव मनाने की परंपरा को कायम रखते हुए उतरालीकाऊ पूरम उत्सव को शानदार तरीके से मनाया जाता है| इस मंदिर में देवी काली की उपासना की जाती है|

उतरालीकाऊ पूरम उत्सव मल्याली पंचांग के अनुसार कुम्भम माह में मनाया जाता है| पश्चिमी पंचांग के अनुसार यह समय फ़रवरी के मध्य माह और मार्च माह के आरंभ में हर वर्ष मनाया जाता है| हर साल मनाया जाने वाला यह पर्व पूरे आठ दिन का होता है|  इस उत्सव में आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है मंदिर से निकालने वाला हाथियों का जुलूस| कई आभूषणों एवम् रंगीन पोशाकों से सजे हुए हाथी जिनके साथ पन्चवाद्यम और पांडीमेलम का जुलूस जुलूस में शामिल हुए हर एक व्यक्ति को आनंद से भर देता है| पारंपरिक रूप से सजायें गये 21 हाथी अपने उपर बैठें महावत के साथ रंग-बिरंगी छतारियाँ, मुलायम पंखों से बने हवादार गुच्छे और मोर पंख की सहायता से जुलूस के रूप में भ्रमण करते है|

इस समय महोत्सव और मंदिर में कई तरह के सांस्कृतिक और लोक कला की प्रदर्शनी वहाँ आए श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है| शाम को होने वालें यह सारें कार्यक्रम लोगों को पूरी तरह से आनंदित कर देते है| महोत्सव के दौरान पारंपरिक तरीकें से सजें इस मंदिर की रोशनी दूर से किसी तारें की चमक का आभास कराती है|  आठ दिनों तक चलने वाले सभी कार्यक्रम पूर्णिमा की रात को संपूर्ण होते है| उत्सव के सौहार्दपूर्ण रूप से पूरे होनी की खुशी में लोग रात भर आतिशबाज़ी करते है जो अगली सुबह होते तक चलती है|

कब मनाया जाता है ?

मल्याली पंचांग के अनुसार आठ दिन तक मनाया जाने यह उत्सव कुम्भम  माह में मनाया जाता है, फ़रवरी-मार्च के दौरान पड़ते है|

कैसे पहुचें ?

रोड द्वारा- पारीतिप्रा, शोरनुर के रास्ते से वाडक्कांचेररी से मात्र 2 किलोमीटर दूर है|

ट्रेन द्वारा- वाडक्कांचेररी स्टेशन सबसे नज़दीकी स्टेशन है|

हवाई जहाज़ द्वारा- त्रिस्सुर शहर कोचि विमानतल से 52 किलोमीटर दूर है|

उतरालीकाऊ पूरम उत्सव का वीडियो







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