साल के 12 महीनों की तरह 12 राशियां होती है और इन 12 राशियों के नाम से प्रत्येक महीने मों एक संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य का राशि परिवर्तन करना ज्योतिष के अनुसार एक अहम घटना माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन से जातकों के राशिफल पर तो असर पड़ता ही है साथ ही सूर्य के इस परिवर्तन से सौर वर्ष के मास की गणना भी की जाती है। कहते हैं सूर्य देव पूरे वर्ष में एक एक कर सभी राशियों में प्रवेश करते हैं उनके इस चक्र को संक्रांति कहा जाता है। मेष राशि से वृषभ राशि में सूर्य का संक्रमण वृषभ संक्रांति कहलाता है। वृषभ संक्रांति का त्योहार ज्येष्ठ महीने की शुरुआत को भी दर्शता है। वृषभ संक्रांति वर्ष में आने वाली 12 संक्रांतियों में से बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली संक्रांति को वृषभ संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक यह वर्ष का दूसरा महीना होता है लेकिन जार्जियन कैलेंडर के अनुसार ये मई-जून का महीना होता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश करता है इसलिए इसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद सूर्य देव और भगवान शिव के 'ऋषभरुद्र' स्वरुप की पूजा करनी चाहिए। प्रसाद के रूप में भगवान को खीर का भोग लगाएं। वृषभ संक्राति पर दान पुण्य का बड़ा ही महत्व होता है। कहते हैं इस दिन दान दक्षिणा देने से बहुत पुण्य मिलता है और इस दिन गौ दान को बहुत ही ख़ास माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि संक्रांति पर गौ दान करना बहुत ही लाभकारी होता है। बिना दान के वृषभ संक्रांति की पूजा अधूरी होती है। माना जाता है कि गौ दान के अलावा वृषभ संक्रांति पर अगर किसी ब्राह्मण को पानी से भरा घड़ा दान किया जाए तो इससे विशेष लाभ मिलता है। वृषभ का अर्थ होता है बैल साथ ही भगवान शिव का वाहन नंदी भी बैल है इसलिए वृषभ संक्रांति का अपना एक अलग ही महत्व होता है। भारत के विभिन हिस्सों में वृषभ संक्रांति को अलग अलग नामों से जाना जाता है। दक्षिण भारत में वृषभ संक्रांति को वृषभ संक्रमन के रूप में जाना जाता है। वहीं सौर कैलेंडर के अनुसार इस त्योहार को नए मौसम की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। तमिल कैलेंडर में इसे वैगसी मासुम का आगमन कहा जाता है तो मलयालम कैलेंडर में 'एदाम मसम'। बंगाली कैलेंडर में इसे 'ज्योत्तो मश' का प्रतीक माना जाता है। ओडिशा में वृषभ संक्रांति को 'ब्रश संक्रांति' के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष वृषभ संक्रांति 15 मई बुधवार को मनाई जाएगी।

वृषभ संक्रांति

वृषभ संक्रांति महत्व एवं पूजा विधि

हिन्दू धर्म के अनुसार वृषभ संक्रांति के दिन गौदान का बहुत खास महत्व होता है। इसलिए बहुत से लोग इस दिन ब्राह्मणों को गौ दान करते है। इसके अलावा इस संक्रांति में उपवास का भी बहुत खास महत्व होता है। जिसमे प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व स्नान करके भगवान् शिव का पूजन किया जाता है। जिसमे भगवान शिव के रिषभरूद्र स्वरुप को पूजा जाता है। वृषभ संक्रांति में व्रत रखने वाले व्यक्ति को रात्रि में जमीन पर सोना होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार वृषभ संक्रांति के दिन गौदान का बहुत खास महत्व होता है। इसलिए बहुत से लोग इस दिन ब्राह्मणों को गौ दान करते है। इसके अलावा इस संक्रांति में उपवास का भी बहुत खास महत्व होता है। जिसमे प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व स्नान करके भगवान् शिव का पूजन किया जाता है। जिसमे भगवान शिव के रिषभरूद्र स्वरुप को पूजा जाता है। वृषभ संक्रांति में व्रत रखने वाले व्यक्ति को रात्रि में जमीन पर सोना होता है। संक्रांति के दिन गरीबों, ब्राह्मणों और जरुरतमंदों को दान आदि करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग इस दिन जरुरत की वस्तुएं और खान पान की चीजों का दान करते है। संक्रांति मुहूर्त के पहले आने वाली 16 घड़ियों को बहुत शुभ माना जाता है। इस समय में दान, मंत्रोच्चारण, पितृ तर्पण और शांति पूजा करवाना भी बहुत अच्छा माना जाता है। इसके अलावा इस समय में गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

वृषभ संक्रांति उत्सव

वृषभ संक्रांति पर दूध के रुप में उपहार देने वाली गायों को शुभ माना जाता है। भक्त विशेष रूप से इस शुभ दिन विष्णु मंदिरों पर जाते हैं और भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करने ज्ञान दें। पूरे देश में पवित्र स्थान वृषभ संक्रांति के लिए तैयारी की जाती है क्योंकि भक्त इस दिन संक्रमन स्नान करते हैं। पितृ तर्पण के लिए भी वृषभ संक्रांति शुभ मानी जाती है ओडिशा में भक्त इस दिन ब्रुश संक्रांति के रूप में मनाते हैं। वह इस दिन नदियों और समुद्र में स्नान करने जातें हैं ताकि पितृ तर्पण कर सकें। इस विशेष स्नान को संक्रमन स्नान के नाम से जाना जाता है जिसके तहत परिवार के पूर्वजों की आत्मा की शांति को लिए किया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य को भी स्मानित करने के लिए स्नान दान किया जाता है। उड़ीसा में भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने पुरी आतें है। पुरी के घांटों पर स्नान करते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं। ब्रुश संक्रांति स्नान पुरी में पूर्ण धार्मिक उत्साह के साथ किया जाता है और भक्त इस धार्मिक अवसर पर सूर्य भगवान से आशीर्वाद मांगते हैं। भक्त भगवान विष्णु से आशीर्वाद मांगने के लिए जगन्नाथ मंदिर भी जाते हैं। देश के कुछ हिस्सों में वृषभ संक्रांति को आमतौर पर वृषभ संक्रमन के रूप में जाना जाता है। वृषभ को संस्कृत में बैल के रूप में जाना जाता है। भगवान शिव के वाहक नंदी भी एक बैल हैं जो भगवान शिव के सबसे प्रिय भक्त है इसलिए इस दिन पर भगवान शिव की अराधना करने से शुभ फल प्राप्त होता है। माना जाता है कि भगवान, ब्रह्मा दुनिया के निर्माता हैं, भगवान विष्णु पूरे ब्रह्मांड की देखभाल करने के लिए ज़िम्मेदार है और भगवान शिव (जिसे महेश भी कहा जाता है) इसे नष्ट करने के लिए जिम्मेदार है। इस प्रकार ब्रह्मांड में संतुलन बनाए रखने के लिए तीनों का होना आवश्यक है। जीवन का यह चक्र इन्हीं तीनों के कराण चलता है। इसलिए वृषभ संक्रांति के भक्तों के लिए बहुत धार्मिक महत्व है और वे भगवान विष्णु से आशीर्वाद मांगकर दिन को विशेष बनाते हैं। लोग प्रार्थना करते हैं कि वो मोह- माया में फंसे बिना बेहतर जीवन जी सकें ताकि वे फिर से जन्म लेने से मुक्त हों उन्हें मुक्ति प्राप्त हो सके। वृषभ संक्राति मोक्ष भी दिलाती है।
वृषभ संक्रांति
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