"उस देश की सरहद को कोई छू नहीं सकता जिस देश की सरहद की निगहेबान है आंखे"

यह सच ही है उस देश की तरफ कोई आंख उठाकर भी नहीं देख सकता जहां देश के लिए मर-मिटने वाले जवान तैनात हों। एक सैनिक सिर्फ अपने देश के लिए जीता है, देश के लिए कुर्बान हो जाता है। कहने को तो हम सब एक ही मनुष्य है एक ही हैं लेकिन यदि हम सब से उपर उठकर कोई है तो वो है हमारे देश के जवान, हमारी देश की सेना। यह लोग दिखते हमारी ही तरह है लेकिन हमारी तरह स्वार्थी नहीं होते। केवल अपने बारे में नहीं सोचते अपितु अपने देश, अपने देश के लोगों के लिए, हमारे लिए जीते है। यदि सरहदों पर यह सेना ना हो तो हम एक पल को चैन की सांस भी नहीं ले सकते। सेना राष्ट्र के लिए गर्व की बात होती है। किसी भी राष्ट्र का गुरुर उसकी सेना ही होती है। अपने-अपने राष्ट्रों के लिए प्रतिक्षण ना जाने कितने ही सैनिक शहीद हो जाते है इन गुमनाम हीरों और वीरों को सम्मानित करने और उन्हें याद करने के लिए विश्व सेना दिवस प्रतिवर्ष 30 जून को मनाया जाता है। प्रत्येक देश में सैन्य ताकतों द्वारा दी जाने वाली अमूल्य सेवा के प्रति यह दिवस मनाया जाता है। इस उत्सव को मनाने के लिए कोई एक सटीक दिन निश्चित नहीं है क्योंकि यह देशों की अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है। प्रत्येक देश का अपना अलग-अलग सेना दिवस होता है। संयुक्त राज्य अमरीकी में इसे 17 मई 2014 को मनाया गया, तो वहीं संयुक्त राज संघ में इसे 28 जून 2014 को मनाया गया। भारत में सेना दिवस प्रतिवर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। वहीं अर्जेंटीना में एक अलग दिन प्रत्येक सशस्त्र बल को समर्पित किया गया है। इस बार विश्व सैन्य दिवस 30 जून को मनाया जाएगा।

विश्व सैन्य दिवस
क्या है विश्व सेना दिवस

विश्व सेना दिवस मूल रुप से तीनों सेना (जल सेना, वायु सेना, थल सेना) तीनों के सम्मान में मनाया जाने वाले दिवस है। देश में विश्व सैन्य दिवस को बहुत महत्व दिया जाता है। सेना के वीर जवान बहादूरी के साथ लड़ते हुए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। गोला, बारुद, बंदूक, इत्यादि हथियारों के जरिए प्रशिक्षित वीर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ते है। प्रतिवर्ष कितने ही लोग सेना में मातृभूमि के प्रति ज़ज्बा लिए भर्ति होते है। बिना किसी बात की परवाह किए यह लोग अपनी जान लगाकर देश को बाहरी ताकतों से बचाते हैं। जब पूरा शहर अमन, शांति के साथ सो रहा होता है यह जवान, तपती धूप, हाड़ कंपा देने वाली ठंड, बारिश इत्यादि सभी मौसम में दिन-रात देश की सेवा में लगे रहते हैं ताकि देश में सूकून बना रहें। वहीं इन जाबांजों को कई बार राजनितिक लापरवाही के कारण उचित संसाधन, बल, सम्मान तक नहीं दिया जाता। जिसे देखते हुए इन वीरों के सम्मान के लिए 1 दिन विशेष रुप से इनके लिए निर्धारित किया गया है। जहां राष्ट्र एक होकर सेना के जवानों का सम्मान करता है। विशेष रुप से इस दिन रक्षा बलों को उनकी जिम्मेदारियों और भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है। सैन्य बलों में देशभक्ति की भावना और प्रेरित हो इसलिए इस दिन को मनाया जाता है। सैन्य ताकतों को देश की जरुरत पड़ने पर बहादूरों की तरह लड़ने के लिए भी याद किया जाता है। किसी भी अनदेखे दुश्मनों के हमलों से बचाने में सैन्य बल ही सामने आता है। हथियारों के माध्यम से यह सेना दुश्मनों के छक्के छुड़ा देती है। अधिकारियों के मार्गदर्शन में रह यह सेना अपने कर्तव्य का निर्वहन करती है।

विश्व सैन्य दिवस समारोह

सशस्त्र बलों को उनके द्वारा किए गए सभी कार्यों के लिए सख्त कोड बनाए रखने के लिए जाना जाता है और विश्व सैन्य दिवस इस संबंध में कोई अपवाद नहीं है। सेना की कई ईकाइयां एक साथ मिलकर इस दिन का जश्न मनाती है। सैनिक, कप्तान, फील्ड मार्शल, स्कॉडन लीडर इत्यादि सभी इस दिन पर एक साथ मिलते हैं। एक दूसरे से रुबरु होते है। थल, जल, वायु तीनों सेनाएं एक दूसरे से परिचित होती है। इस दिवस को विशेष और यादगार बनाने के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मुख्य अतिथियों के लिए सैना का मार्च भी आयोजित किया जाता है। सैन्य परेड इस दिवस पर प्रमुख आकर्षण का केंद्र होती है जहां सभी सेनाए अपनी-अपनी ताकतों के साथ शक्ति प्रदर्शन करती हैं। जहां थल सेना अपनी बंदूकों और परेड के जरिए अपना करतब दिखती हैं, वहीं नौसेना बड़े-बड़े समुद्री जहाजों और पनडुब्बियों के साथ अपने सर्वोत्तम हथियार प्रदर्शित करती हैं ताकि वह अपनी ताकत को दूनिया के समक्ष रख सके। हवा में लड़ाकू विमानों के साथ बादलों के बीच रंग-बिरंगी आकृतियां बनाकर वायु सेना अपनी गति का परिचय देती है। किसी भी देश के बीच शांति और युद्ध में संतुलन बनाने का काम यह सैन्य ताकतें ही करती हैं। विश्व में आज बढ़ते तनाव के बीच सैन्य ताकते महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। दुश्मनों को रोके रख देश में शांति का माहौल स्थापित करती हैं। यदि देश में यह सेना ना हो तो देश ही नहीं रहेगा।

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