सुभाष चंद्र बोस जयंती

भारत एक ऐसा देश है जिसने हमेशा अपने स्वतंत्रता सेनानियों, नेताओं और शहीदों के योगदान को पहचाना है। उनके जन्मदिन को जयंती, उनके मरणदिन को पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। भगत सिंह, सुखदेव, महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे कई नेताओं के नाम इस फेहरिस्त में है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन या नेताजी की जयंती 23 जनवरी को देश प्रेम दिवस के रूप में देशभक्ति और देश प्रेम के लिए मनाई जाती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय इतिहास के एक महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सैनानी के रुप में पहचाने जाते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक विलक्षण छात्र और राष्ट्रप्रेमी थे। वह 9 भाई-बहनों में से एक थे। भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में उनकी रैंक 4 थी। इसके बावजूद उन्होंने नौकरी ठुकरा दी थी और अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित कर दिया था। ।

सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय

23 जनवरी 1897 के दिनभारत के महान स्वतंत्रता सैनानी सुभाष चंद्र बोस का जन्न हुआ था। उनका जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के यहां हुआ। उनके पिता ने अंगरेजों के दमनचक्र के विरोध में 'रायबहादुर' की उपाधि लौटा दी। इससे सुभाष के मन में अंगरेजों के प्रति कटुता ने घर कर लिया था। आईसीएस की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दे दिया और स्वतंत्रता की लड़ाई में वह अग्रसर हो गए।

दिसंबर 1927 में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के बाद 1938 में उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया गया किन्तु धीरे-धीरे कांग्रेस से सुभाष का मोह भंग होने लगा। 16 मार्च 1939 को सुभाष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुभाष ने आजादी के आंदोलन को एक नई राह देते हुए युवाओं को संगठित करने का प्रयास पूरी निष्ठा से शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में 'भारतीय स्वाधीनता सम्मेलन' के साथ हुई।

5 जुलाई 1943 को 'आजाद हिन्द फौज' का विधिवत गठन हुआ। 21 अक्टूबर 1943 को एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीयों का सम्मेलन कर उसमें अस्थायी स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया।

12 सितंबर 1944 को रंगून के जुबली हॉल में शहीद यतीन्द्र दास के स्मृति दिवस पर नेताजी ने अत्यंत मार्मिक भाषण देते हुए कहा- 'अब हमारी आजादी निश्चित है, परंतु आजादी बलिदान मांगती है। आप मुझे खून दो, मैं आपको आजादी दूंगा।' यही देश के नौजवानों में प्राण फूंकने वाला वाक्य था, जो भारत ही नहीं विश्व के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

16 अगस्त 1945 को टोक्यो के लिए निकलने पर ताइहोकु हवाई अड्डे पर नेताजी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और माना जाता है इसमें उनकी मृत्यु हो गई थी।

सुभाष चंद्र बोस की जयंती का महत्व

बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने जनता के बीच राष्ट्रीय एकता, बलिदान और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना का प्रसार किया। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दौरान नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और भारतीय राष्ट्रीय सेना का नेतृत्व किया। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा अहिंसक दृष्टिकोण के विरोध के रूप में विरोध करने के लिए एक क्रांतिकारी और हिंसक तरीके की वकालत की। महात्मा गांधी के साथ मतभेदों के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से अलग हो गए और 3 मई 1939 को "ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक" के नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की। पार्टी ने सरकार से "देश प्रेम दिवस" के रूप में मनाने की घोषणा की और पूरे देश में इसे जुनून के साथ मनाया गया। शहादत, बलिदान और देशभक्ति की यादें ताजा हो गईं। पूरे भारत में इस दिन कई समारोह होते हैं।

सुभाष चंद्र बोस जयंती के समारोह

सुभाष चंद्र बोस जयंती को फॉरवर्ड ब्लॉक के पार्टी सदस्यों के बीच भव्य तरीके से मनाया जाता है। सभी जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिक निकाय भी नेताजी जयंती मनाते हैं। कई एन.जी.ओ रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं। स्कूल छात्रों में समर्पण, ईमानदारी और लड़ाई की भावना को पैदा करने का अवसर मनाते हैं। स्कूल विभिन्न गतिविधियों को प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, वाद-विवाद, बहिष्कार, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह के रूप में आयोजित करते हैं।

सुभाष चंद्र बोस जयंती मनाने का समय

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को देश प्रेम दिवस या नेताजी जयंती के रूप में मनाया जाता है जो हर साल 23 जनवरी को मनाया जाता है। नेताजी जयंती को पश्चिम बंगाल राज्य में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है।

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