विश्व जल दिवस

पानी हम सभी की आवश्यकता है। मनुष्य बोजन के बिना तो कुछ दिन जीवित रह सकता है लेकिन पानी के बिना उसका जीवन मुमकिन नहीं है। पृथ्वी की सतह का 71% हिस्सा पानी से भरा हुआ है। एस्चेरिचिया कोलाई की एक एकल कोशिका में 70% पानी, एक मानव शरीर 60-70%, पौधे का शरीर 90% तक और एक वयस्क जेलिफ़िश का शरीर 94-98% पानी से बना होता है। लेकिन फिर भी
दुनिया के कई देशों में गंदे पानी के उपयोग की वजह से हर साल लाखों लोग बीमार होते हैं। कई बार इनमें से कई लोगों की मौत हो जाती है। हम लोग अक्सर पानी की बर्बादी किसी ना किसी रुप में करते हैं जो भविष्य के लिए बड़ा संकट है। पानी के इसी दुरुपयोग को रोकने एवं जल की महत्वता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।  जल को शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय विश्व जल दिवस मीठे पानी के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने और मीठे पानी के संसाधनों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए हर साल आयोजित किया जाता है। हर साल इसका विषय अलग होता है।

पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) ने 1992 में पीने के पानी का जश्न मनाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने का फैसला किया और इस तरह 22 मार्च 1993 को पहला विश्व जल दिवस मनाया गया।

विश्व जल दिवस की महत्वता

आज के समय में पूरे विश्व में जल का संकट व्याप्त हैl दुनिया औद्योगीकरण की राह पर चल रही है, किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल पाना कठिन होता जा रहा हैl विश्व भर में साफ और पीने योग्य जल की अनुपलब्धता के कारण ही जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैंl समय के साथ इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता चला गया और उसे बर्बाद करता रहा, जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है। 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) में विश्व जल दिवस की पहल की गई थीl इसके परिणामस्वरूप 1993 में 22 मार्च को पहली बार “विश्व जल दिवस” का आयोजन किया गयाl इसके बाद से हर वर्ष लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये 22 मार्च को “विश्व जल दिवस” मनाया जाता हैl

वॉटर एंड संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के कुल जमीनी पानी का 24 फीसदी भारतीय उपयोग करते हैं। वाटर एड संस्था की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के कुल जमीनी पानी का 24 फीसदी भारतीय उपयोग करते हैं। देश में 1170 मिमी औसत बारिश होती है, लेकिन हम इसका सिर्फ 6 फीसदी पानी ही सुरक्षित रख पाते हैं।

एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड द्वारा तय मात्रा की तुलना में भूमिगत पानी का 70 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहा है।

विश्व जल का उद्देश्य विश्व के सभी विकसित देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है। यह जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच में जल संरक्षण का महत्व साफ पीने योग्य जल का महत्व आदि बताना है।

विश्व जल दिवस के कार्यक्रम

विश्व जल दिवस के दिन लोगों में जल के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम आयेजित किए जाते हैं। यह विभिन्न घटनाओं और गतिविधियों जैसे कि दृश्य कला, पानी की धुन और संगीत समारोह, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जल जलाशय, जल प्रबंधन और स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चर्चाओं पर सुरक्षा के द्वारा मनाया जाता है। टेलीविजन और रेडियो चैनल या शिक्षा कार्यक्रम स्वच्छ जल और संरक्षण उपायों के महत्व पर आधारित, इंटरनेट और बहुत सारी गतिविधियों के माध्यम से संदेश फैलाया जाता है।

आज दुनिया के हर आठ में से एक व्यक्ति को दूर के संसाधनों से पानी इकट्ठा करने में महिलाओं और बच्चों द्वारा घंटों खर्च करने के बावजूद शुद्ध पानी नहीं मिलता है। यह दिन उस दिन को प्राप्त करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को याद करने का अवसर देता है जब दुनिया में सभी के पास सुरक्षित पेयजल हो सकता है और साथ ही आठ देशों में लगभग 3 लाख लोगों को स्वच्छ पानी और स्वच्छता लाने की प्रगति का जश्न मनाने के लिए भी यह दिन असर देता है।। संयुक्त राष्ट्र-जल 2003 में जल के लिए विश्व दिवस की शुरुआत के बाद से विषय और संदेशों को चुनने के लिए जिम्मेदार है।

विश्व जल दिवस की थीम

2019: किसी को पीछे नही छोड़ना (लीवींग नो वन बीहांइड)।
2018: जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान।
2017: अपशिष्ट जल।
2016: जल और नौकरियाँ।
2015: जल और दीर्घकालिक विकास।
2014: जल और ऊर्जा।
2013: जल सहयोग।
2012: जल और खाद्य सुरक्षा।
2011: शहर के लिये जल: शहरी चुनौती के लिये प्रतिक्रिया।
2010: स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल।
2009: जल के पार।
2008: स्वच्छता।
2007: जल दुर्लभता के साथ मुंडेर।
2006: जल और संस्कृति।
2005: 2005-2015 जीवन के लिये पानी।
2004: जल और आपदा।
2003: भविष्य के लिये जल।
2002: विकास के लिये जल।
2001: स्वास्थ के लिये जल।
2000: 21वीं सदी के लिये पानी।
1999: हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है।
1998: भूमी जल- अदृश्य संसाधन।
1997: विश्व का जल: क्या पर्याप्त है।
1996: प्यासे शहर के लिये पानी।
1995: महिला और जल।
1994: हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है।
1993: शहर के लिये जल।



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